कैमूर जिले के चैनपुर में स्थित हरसू ब्रह्म धाम की पहचान प्रेत आत्माओं को जंजीरों में जकड़ कैद करने के लिए है। लोगों का मानना है कि पिछले 650 सालों से यहां भूतों का मेला लग रहा है। प्रेत आत्माओं की बुरी नजर से लोगों को यहां बचाया जाता है। बिहार के अलावा झारखंड, यूपी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से लोग हरसू ब्रह्म धाम पहुंचते हैं।
108 ब्रह्म स्थानों में पहला हरसू
पूरे भारत में 108 ब्रह्म स्थानों में से पहला हरसू है। हरसू ब्रह्म ट्रस्ट के सचिव कैलाश पति त्रिपाठी बताते हैं कि 1428 ईवी के दौरान यहां राजा शालिवाहन की हुकूमत थी। हरसू पांडे राजा शालिवाहन के प्रधानमंत्री और राजपुरोहित थे। राजा शालिवाहन को पुत्र की प्राप्ति नहीं हो रही थी लिहाजा वे चिंतित रहते थे। उनके राजपुरोहित हरशु पांडे ने उन्हें दूसरी शादी का प्रस्ताव दिया। लेकिन, शालिवाहन ने दूसरी शादी की तो पुत्र की प्राप्ति भी हुई।

हरसू ब्रह्म धाम में पेड़ के पास मन्नत भी मांगी जाती है।
पुरोहित के घर को जमींदोज कर दिया था
मान्यताओं के मुताबिक राजपुरोहित ने तब जो नियम बताए थे, राजा ने तोड़ दिया था। राजा की पहली रानी के कहने पर राजा ने राजपुरोहित का घर जमींदोज कर दिया। गुस्से में आकर राजपुरोहित ने राजा के महल में 21 दिन आमरण अनशन पर बैठे। जनवरी 1914 ईस्वी में अपना शरीर त्याग दिया। इसके बाद राजा शालिवाहन का पूरा राज पाठ खत्म हो गया, जिस जगह पर राजपुरोहित ने अपना शरीर त्याग किया था। वहीं, आज की तारीख में हरसू ब्रह्म का गर्भगृह है।
नवरात्र में उमड़ती है भीड़
शारदीय और चैत्र नवरात्रि में भक्तों की भीड़ यहां लगती है। हरसू ब्रह्म ट्रस्ट के सचिव कमलेश त्रिपाठी ने बताया कि पूरे भारत में हरसू ब्रह्म शीर्ष तांत्रिक शक्तिपीठ है। बुरी आत्माओं से पीड़ित लोग यहां से ठीक होकर जाते हैं। यहां के कुछ नियम है। मंत्र हैं। पूजा पद्धति है। जतन है और रीति रिवाज भी। जिसके चलते प्रेत आत्माओं से पीड़ित लोगों का कल्याण होता है। सबसे बड़ी बात यह कि सच्चे मन से श्रद्धा लेकर आने वाले लोगों का हर मनोंकामनाएं पूर्ण होती है।

मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़।
हवन कुंड में आहुति
यहां के तांत्रिक हाथ में दंड लेकर प्रेत आत्माओं को भगाते हैं। एक तांत्रिक ने बताया कि हरसू ब्रह्म की जो पूजा पद्धति थी। उसी के आधार पर पूजा पद्धति यहां की जाती है। हरसू ब्रह्म की इष्ट देवी मां कामाख्या गुवाहाटी थी। यहां सोमवार और शुक्रवार को भूत प्रेत आत्माओं से पीड़ित लोग बहुतायत की संख्या में आते हैं। यहां एक हवन कुंड है, उस हवन कुंड में प्रेत आत्माओं की आहुति दी जाती है। इस जगह को सुप्रीम कोर्ट भी कहा जाता है।
बाबा के फैसले पर प्रेत आत्माओं को मृत्युदंड भी दिया जाता है। हरसू ब्रह्म स्थान धाम में भूत-प्रेत से पीड़ित लोग ही नहीं। बल्कि हजारों की संख्या में आम लोग भी पहुंचते हैं। हरसू ब्रह्म धाम 2001 से धार्मिक न्यास परिषद के अधीन पूरी तरह से हो गया है। लेकिन, अब भी मूल सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। दूरदराज से आए हुए लोगों के लिए रहने की व्यवस्था नहीं है।



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