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65 साल के हरिहर सहनी की ओलंपिक दौड़ की तमन्ना

बगहा के हरिहर सहनी ने पूरे बिहार में जिले का नाम रौशन किया है। 65 वर्ष की उम्र में बिहार हाफ मैराथन दौड़ में प्रथम स्थान और पूरे देश मे चौथा स्थान लाकर इस बात को साबित कर दिया है। हरिहर सहनी को जानने वाले शास्त्रीनगर के लोग बताते हैं कि उन्हें बचपन से देखते आ रहे हैं। शुरू से ही लगन एवं मेहनत के साथ मुकाम हासिल किए हैं। यह बगहा के लिए ही नहीं, पूरे बिहार के लिए गौरव की बात है। आज हरिहर सहनी की सफलता पर पूरा ज़िला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

सहनी कहते हैं कि अब उनकी ओलंपिक में भाग लेने की तमन्ना है। चंडीगढ़ में 24 मार्च को आयोजित टफमैन मैराथन में 41 किलोमीटर की दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। आज भी रोज 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं।

सहनी को मिले मेडल।

सहनी को मिले मेडल।

रिकॉर्ड बनाने की है ख्वाहिश
हरिहर सहनी की ख्वाहिश है कि उम्र की इस दहलीज पर भी मैराथन दौड़ में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएं। 65 से 70 वर्ष के बीच ओलंपिक मैराथन में जाएं और वहां से गोल्ड मेडल जीत कर भारत का नाम ऊंचा करें। कहा कि उनकी कोई विशेष डाइट नहीं है, घर में जो भी बना होता है, उसे ही खाते हैं। कई मैराथन जीत चुके हैं। बताते चलें कि वर्ष 2019 में आयोजित टफमैन हाफ मैराथन में हरिहर ने ढाई घंटे में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी की, जबकि इस हाफ मैराथन को पूरा करने का समय साढ़े तीन घंटे का था। वर्ष 2020 में हाफ मैराथन को निश्चित समय से पहले पूरा किया था।

42 किलोमीटर लगाते हैं दौड़
सहनी सुबह चार बजे उठकर तैयारी शुरू कर देते हैं। पहले एक घंटा एक्सरसाइज करते हैं और उसके बाद रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। बताते हैं कि कई बार तो वह अपनी शारीरिक क्षमता को परखने के लिए 42 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। हॉफ मैराथन (21 किलोमीटर) ढाई से तीन घंटे में पूरी कर देते हैं, जबकि मैराथन छह घंटे में पूरी करते हैं।

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