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ग्रहों के मंत्रिमंडल का हुआ गठन, राजा बने शनि, विश्व भर में आंतरिक समस्याएं लेंगी गंभीर रूप

आज से हिंदी नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2079 की शुरुआत हो गई है। इसी के साथ ग्रहों के नए मंत्रिमंडल का भी गठन हो गया है। चैत्र नवरात्र प्रतिपदा तिथि शनिवार से शनि ग्रहों के राजा बन गए हैं। मंगल से ग्रहों की सत्ता शनि के हाथ आ गई है। इस वर्ष के संवत्सर का नाम “राक्षस” है। शनि देव के राजा होने से पूरे विश्व भर में आंतरिक समस्याएं गंभीर रूप लेंगी। इस वर्ष बारिश होने के दो योग बन रहे हैं। देश के कुछ भागों में अत्यधिक वर्षा होगी, जबकि कहीं-कहीं सूखा पड़ने के भी योग बन रहे है।

जय मां वैष्णो देवी ज्योतिष तंत्र एवं अनुसंधान के तंत्राचार्य आचार्य योगेश पांडेय के मुताबिक, ग्रहों के मंत्रिमंडल का प्रभाव पूरे साल दिखाई देता है। इसका असर ग्रहों के मुताबिक हर इंसान और पर्यावरण पर भी पड़ता है। आचार्य ने बताया कि जिस तरह से विधानसभा और लोकसभा का गठन होता है, ठीक उसी तरह ही ग्रहों के मंत्रिमंडल का भी गठन होता है। लोकसभा और राज्यसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है, जबकि ग्रहों के मंत्रिमंडल का कार्यकाल एक साल का होता है। हर साल नवरात्र प्रतिपदा तिथि की तरह इस वर्ष शनिवार को ग्रहों के मंत्रिमंडल का गठन हो गया है।’ आइए जानते हैं कैसा होगा मंत्रिमंडल और ग्रहों का प्रभाव…

10 विभागों में 5 पापक ग्रहों के हाथ

आर्चाय योगेश ने बताया कि प्रधानमंत्री की तरह ग्रहों के मंत्रिमंडल के राजा शनि हुए हैं। सत्ता एक साल तक शनि के हाथ ही होगी। युवराज शनि देव के हाथ सत्ता आने से ग्रहों का प्रभाव भी शनि के हिसाब से ही होगा। मुख्यमंत्री यानी मंत्री का पद ग्रह राज देव बृहस्पति को प्राप्त हुआ है। ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि इस वर्ष आकाशीय मंत्रिमंडल परिषद के कुल 10 विभागों में 5 विभाग पापक ग्रहों के हाथ है, जबकि 5 विभाग शुभ ग्रहों के हाथ है। इस कारण से प्रभाव भी ग्रहों के पापक व शुभ के हिसाब से ही होगा।

देश के महत्वपूर्ण लोगों का हो सकता निधन

आचार्य योगेश पांडेय के मतानुसार, हिन्दी नव वर्ष पर विशेष व अद्भुत दुर्लभ संयोग बन रहा है। मंत्रिमंडल के गठन और नववर्ष के फलादेश को लेकर आचार्य ने बताया कि इस वर्ष के राजा शनि और मंत्री गुरु देव बृहस्पति है। इस वर्ष के संवतसर क नाम “राक्षस” है। शनि देव के राजा होने से पूरे विश्व भर में आतंरिक समस्याएं गंभीर रूप लेंगी। लुटेरों का प्रभाव बढ़ेगा। धन संपदा की हानि हो सकती है। भूख और बीमारियों से जनता में त्रासदी की स्थिति हो सकती है। देश में कुछ अति महत्वपूर्ण लोगों का निधन भी हो सकता है। साथ ही शनि के प्रभाव से नाना प्रकार के रोग एवं व्याधियों का फैलाव भी हो सकता है।

गुरु बृहस्पति से देश को मिलेगा नया आयाम

हालांकि, मंत्री देव गुरु के प्रभाव से काफी लाभ होगा और आम जनमानस में काफी पॉजिटिव असर दिखाई पड़ेगा। देश में गुरु के प्रभा से काफी चमत्कार होगा। लोगों में बुद्धि और ज्ञान का तर्क बढ़ेगा। देश और राज्यों की सत्ता में बैठे राज नेताओं एवं उच्च अधिकारी से विकास कौशल देखने को मिलेगा। ऐसा लगेगा कि राजनैतिक एव प्रशासनिक निर्णय में कोई दैवीय शक्ति प्रेरक तत्व का काम कर रही है।

बृहस्पति से मजबूत होगी आर्थिक स्थिति

ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि वार्षिक फलादेश में मेषांक लग्न की कुंडली मी बहुत महत्वपूर्ण है। तदनुसार केन्द्र स्थान का बृहस्पति स्वगृही होकर बलवान है और बुधादित्य योग बन रहा है। इससे देश में विभिन्न प्रकार के करों से प्रचुर धन राशि एकत्रित हो जाएगी एवं जनता के लिए तथ देश की कल्याण कारी परियोजनाओं में धन का निवेश किया जाएगा। देश में किसानों के लिए नई-नई योजना का निर्माण किया जाएगा, जिससे किसानों को विशेष रूप से लाभ होगा। इस वर्ष वर्षा होने के दो योग बन रहे हैं। देश के कुछ भागों में अत्यधिक वर्षा होगी, जबकि कहीं कहीं सूखा पडने के भी योग बन रहे है। कुल मिलाकर राजा शनि और मंत्री गुरु देव बृहस्पति आपस में मित्र होने के नाते राजनैतिक प्रशासनिक व्यवस्था का संतुलन सामंजस्य कठिनाइयों से भी रास्ता निकलता रहेगा।

जानिए किस ग्रह के पास क्या है विभाग

राजा का पद शनि को मिला है, जबकि मंत्री देव गुरु वृहस्पति हैं। सुख सुविधा और वैभव के मालिक सूर्य हैं, जबकि दुर्गेश यानि सुख सुविधा परिवहन तकनीकी विभाग संसाधन का विभाग बुध के हाथ है। इसके प्रभाव से देश में इस दिशा में काफी बदलाव होगा। साथ ही नए सृजन होंगे। वित्त का जिम्मा राजा शनि अपने पास रखे हैं। वित्त विभाग शनि के हाथ होने सरकारी पैसे का सदुउपयोग होगा। देश में कर एवं राजस्व से आए अधन का अधिक भाग विकास में खर्च होगा। रसेस यानि पानी, तेल और उत्पादल व भूमि के मालिक मंगल को बनाया गया है। इनके प्रभाव से रस प्रभाव का उत्पादन अधिक होगा, इससे जनता को काफी लाभ होगा। राजनेता घोटाला नहीं कर पाएंगे।

दवा और बाजार व औषधि का विभाग शुक्र को बनाया गया है। यह काफी अच्छा संयोग है कि शुक्र को ही स्वास्थ्य का जिम्मा दिया गया है। इससे लोगों की सेहत बेहतर होगी और देश में चिकित्सा की व्यवस्था भी उच्च होगी। उत्पादन विभाग जिसमें लोहा, शीशा कोयला और अन्य ठोस काले रंग के वस्तुएं वाहन का पूरा जिम्मा शनि ने अपने पास रखा है। इससे लोहा और गाड़ियों के भाव में बढ़ोत्तरी होगी। फलेश बुध हैं, इससे फलों की खेती अच्छी होगी। खाद्य वस्तुएं बेहतर होंगी, जिससे किसानों को काफी लाभ होगा और आम जनता भी राहत में होगी।

वर्षा के मालिक भी बुध को बनाया गया है। इनके प्रभाव से वर्षा कहीं अधिक तो कहीं कमी होगी। हालांकि, अनाज व रस पदार्थों का उत्पादन काफी बढ़ेगा। इसके साथ धार्मिक अनुष्ठानों व धार्मिक स्थलों की भी वृद्धि होगी। सरकार के द्वारा धार्मिक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस वर्ष संवतसर राक्षस नामक है जो 49 वां संवत्सर है इसे 2079 संवत के रुप में जाना जाएगा।

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