गर्मी की धमक पड़ते ही मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार में AES और चमकी बुखार का डर सताने लगता है। हर साल सैकड़ों बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते हैं। लेकिन, इस बार जिला स्वास्थ्य समिति और जिला प्रशासन की टीम अभी से सजग है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस बीमारी को रोकने का प्रमुख हथियार जागरूकता है। जागरूकता फैलाने और परिजन के सजग रहने से इस पर काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
इसके लिए जिले के करीब नौ लाख घरों में हैंडबिल और पैम्पलेट बांटे जाएंगे। जिस पर इस बीमारी के लक्षण, बचाव और बीमार पड़ने पर क्या करें। ये लिखा होगा। साथ ही महत्वपूर्ण नम्बर भी अंकित होंगे। मुख्य रूप से ग्रामीण, सुदूर इलाकों पर विभाग फोकस कर रही है। क्योंकि सबसे अधिक मामले उन्हीं इलाकों से सामने आते हैं। इसके अलावा बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से भी सर्वाधिक केस सामने आएं हैं। इसमें औराई, मीनापुर, साहेबगंज, कांटी, बोचहां, मुशहरी समेत अन्य प्रखंड हैं। इन इलाकों में जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

रेडियो, सोशल मीडिया भी माध्यम
जागरूकता फैलाने के रेडियो, सोशल मीडिया और टेलीविजन भी माध्यम बनाया गया है। इसके लिए एक ऑडियो भी तैयार किया गया है। जिसमें जागरूकता और बचाव से सम्बंधित सभी जानकारी दी गयी है। इसके अलावा गली-मोहल्लों में कचरा उठाव के लिए निगम की जो गाड़ियां घूमती हैं। उसमें भी अब लाउडस्पीकर लगाकर इस बीमारी से सम्बंधित ऑडियो बजाए जाएंगे।
385 पंचायतों में नुक्कड़ नाटक का आयोजन
जिले के 385 पंचायतों में नुक्कड़ नाटक का आयोजन समय-समय पर किया जाएगा। इसके माध्यम से इस बीमारी के परिणाम और इससे बचाव/उपाय बताए जाएंगे। इसके साथ ही हॉस्पिटल में भी अभी भी उपकरण और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। साथ ही रिटायर डॉक्टरों की भी लिस्ट बनाई जा रही है। ताकि किसी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।



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