गर्मी का मौसम आते ही मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार/AES की बीमारी का खतरा बच्चों पर मंडराने लगता है। ये बीमारी मुख्य रूप से 1-15 वर्ष तक के बच्चों पर अटैक करती है। इस बीमारी की चपेट में सिर्फ मुजफ्फरपुर ही नहीं बल्कि उत्तर बिहार के कई जिलों के बच्चे आते हैं। इस पर नियंत्रण और जागरूकता के जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस बार भी इस बीमारी से निपटने के लिए जिला प्रशासन अभी से सजग है।
आंगनबाड़ी सेविका करेंगी जागरूक
आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी इस बीमारी के प्रति घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी दी गयी है। इसके अलावा सभी सरकारी भवन, PHC, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, बस स्टैंड, रेलवे स्टैंड, महादलित बस्ती समेत अन्य सभी जगहों पर बैनर-पोस्टर और दीवार लेखन किया जाएगा। ताकि हर आते-जाते व्यक्ति की नजर इस पर पड़े। इन बैनर पोस्टर पर बीमारी के लक्षण से लेकर बचाव, सुझाव लिखें जायेंगे।
क्या है इस बीमारी के लक्षण
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- बेहोश होना

कैसे करें बचाव
- बच्चों को रात में सोने से पहले भरपेट खाना खिलाएं।
- अगर संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलाएं।
- रात में बच्चे को देखते रहें।
- सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश तो नहीं या उसे बुखार तो नहीं।
- बेहोशी या बुखार होते ही तुरन्त अस्पताल ले जाएं।
- आशा दीदी को सूचित कर फौरन 102 पर कॉल कर एम्बुलेंस मंगवाएं।
क्या बरतें सावधानी
- बच्चों को तेज धूप में ना जाने दें।
- दिन में कम से कम दो बार जरूर नहाएं।
- रात में पूरा भोजन करके सुलाएं।
- लक्षण दिखते ही ORS का घोल या चीनी-नमक का घोल पिलाना शुरू कर दें।
- धूप में पानी या तालाब में जाने देने से बचें।
- हमेशा ताजा खाना ही खिलाएं।

जिला प्रशासन ने छपवाया पम्पलेट।
‘चमकी को धमकी’ स्लोगन के साथ प्रचार
इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘चमकी को धमकी’ स्लोगन के साथ जोर-शोर से प्रचार प्रसार शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा पैम्पलेट, होर्डिंग, बैनर-पोस्टर भी छपवाए गए हैं। जिस पर इस बीमारी के लक्षण और बचाव के साथ क्या करें, इसका जिक्र है। ये सब सभी प्रखंडो और चौक-चौराहे पर बांटने और चिपकाने का काम करने की कवायद शुरू की जा रही है। इसके अलावा कोर कमेटी का भी गठन किया गया है। जिसके दो विंग हैं, AES समन्वय समिति और उप समिति। DM प्रणव कुमार इस टीम की अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा 30 सदस्य भी बनाये गए हैं। जिसमें सिविल सर्जन, नगर आयुक्त, DDC के साथ WHO और UNICEF को भी सदस्य बनाया गया है।
क्या है इस कमेटी के कार्य
इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य AES के प्रति गांव-गांव में जागरूकता फैलाना। इससे बचाव करना। इस बीमारी का पता लगाकर उसका निराकरण खोजना। जिस क्षेत्र के बच्चे अधिक बीमार पड़ रहे हैं। वहां पर जाकर सर्वे करना। उसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर DM को सौंपना। DM इन सदस्यों के साथ समय-समय पर बैठक करेंगे। इस बीमारी का अपडेट लेने के साथ अगर किसी प्रकार की समस्या आ रही है तो उसमें सुधार और बदलाव किये जायेंगे।



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