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बिहार की स्पाइडर गर्ल्स, स्पाइडर मैन की फिल्में देखकर सीखा

आपने रील लाइफ में स्पाइडर मैन को देखा होगा। जो दीवार पर बिना किसी सपोर्ट के चढ़ता है, लेकिन आज हम आपको मिलाने जा रहे हैं रियल लाइफ की स्पाइडर गर्ल्स से। पटना की रहने वाली 11 साल की अक्षिता गुप्ता दीवार पर बिल्कुल स्पाइडर मैन की तरह चढ़ जाती हैं। वो भी बिना किसी ट्रेनिंग के। अक्षिता के साथ-साथ उसकी 9 साल की बहन ने भी इसकी प्रैक्टिस शुरू कर दी है। लोग इन्हें अब टैलेंटेड सिस्टर्स के नाम से जानने लगे हैं।

दानापुर के बीबीगंज निवासी अजीत कुमार की दोनों बेटियों की खूब चर्चा हो रही है। बड़ी बेटी अक्षिता 7वीं क्लास की स्टूडेंट है, जबकि छोटी अभी चौथी क्लास में पढ़ती है। ​​​​​दोनों ​दीवारों और घर की पिलर पर इस कदर चढ़ती हैं जैसे छिपकली बिना किसी सहारे के रेंगती हो। अक्षिता के घर में 12 फीट का मार्बल का पिलर है जिस पर दोनों बहनें बिना किसी सहारे के धड़ाधड़ चढ़ जाती हैं।

स्पाइडर मैन को देखा तो लगा मैं भी कर सकती हूं
अक्षिता ने बताया कि मैं अक्सर मूवी में, कार्टून और स्टोरी बुक में स्पाइडर मैन को स्टंट करते देखती थी। तब सोचती थी कि ये कैसे करते हैं। इसके बाद मैंने इसे घर में ही ट्राई किया। कई बार दीवार पर चढ़ने के दौरान मैं-गिर भी गई। इसे लेकर पापा-मम्मी गुस्सा करते थे। जब भी वे नहीं रहते थे तो मैं अक्सर प्रैक्टिस करती थी। इसके बाद दीवारों पर चढ़ना आसान सा लगने लगा। अब मैं आसानी से खड़ी दीवार पर बिना किसी सहारे के चढ़ जाती हूं।

अक्षिता की छोटी बहन कृपिता को शिव स्तुति भी पूरी तरह कंठस्ठ है। उसने ने बताया कि वह बचपन में जब मां को पूजा के घर में शिव स्तुति पढ़ते देखती थी, तभी से सुन-सुनकर उसने पूरी स्तुति याद कर ली। जिस श्लोक को शुद्ध-शुद्ध पढ़ने में बड़ों के जबान लड़खड़ा जाते हैं। उसे कृपिता लयबद्ध बोलती है।

माता-पिता का सपना हिमालय पर चढ़कर ऊंचा करे नाम
अक्षिता के पापा अजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि उन्हें उनकी बेटियों के इस टैलेंट पर गर्व है। वे चाहते हैं कि आगे चलकर उनकी बेटियां इस 12 फीट के पिलर पर नहीं, बल्कि हिमालय की चोटियों पर चढ़कर हमारा और बिहार का परचम लहराए। वहीं मां संगीता गुप्ता ने कहा कि बचपन से ही उनकी दोनों बेटियां काफी टैलेंटेड रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले तो उन्हें कभी-कभी तो डर लगता था कि ग्रेनाइट की दीवार पर चढ़ने में कहीं वो गिर ना जाए। लेकिन ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। आज वे अपनी बेटियों पर गर्व करती हैं।

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