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मुजफ्फरपुर में 16 साल बाद पकड़ा गया तत्कलीन परीक्षा सहायक

BHMS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड होमियोपैथी सर्जरी) की परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी व छेड़छाड़ कर फेल परीक्षार्थियों को पास कराने के मामले में 16 साल बाद पुलिस ने तत्कालिन परीक्षा सहायक को गिरफ्तार कर लिया। वह रिटायर होने के बाद कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर बिहार विश्वविद्यालय में काम कर रहा था। केस के IO सह विवि थानेदार रामनाथ प्रसाद ने बताया कि आरोपी अमरेश सिंह को गिरफ्तार किया गया है। उसे जेल भेजने की कवायद की जा रही है।

उसके खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश भी जारी हो चुका था। सुपरविजन रिपोर्ट में भी केस ट्रू था। इसी आधार पर उसकी गिरफ्तारी हुई है। उसके साथ इस केस में विवि से जुड़े आठ पदाधिकारी और परीक्षा पास होने वाले 302 परीक्षार्थी भी शामिल थे। आठ पदाधिकारियों में से चार की मौत हो चुकी है। एक गिरफ्तार हो चुका है। शेष तीन की तलाश चल रही है। उनके बारे में भी रिटायर होने की बात पता लगी है। इसके अलावा उन 302 परीक्षार्थियों के भी पता किया जा रहा है।

राज्यपाल के आदेश पर हुआ था केस

2006 में BHMS की परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमे पार्ट 1, पार्ट 2 और पार्ट 3 के 302 परीक्षार्थियों को गलत तरीके से पास कराया गया था। उनके आंसर शीट के साथ छेड़छाड़ कर गलत मार्क्स दिया गया था। जब विवि प्रशसन ने इसकी जांच की तो इसमे संदेह हुआ। इसके बाद आंसर शीट को खोलकर देखा गया। पाया कि टेबुलेशन के साथ मार्क्स में भी छेड़छाड़ की गई है। मामला राजभवन तक पहुंचा था। तत्कालीन राज्यपाल ने इसपर संज्ञान लेते हुए फौरन FIR दर्ज करने का नकरदेसब दिया था। तत्कालीन कुलसचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव के बयान पर विवि थाना में केस दर्ज हुआ था। लेकिन, तब से लेकर आज तक ये मामला लंबित रहा। इसमे पुलिस स्तर से भी हीलाहवाली की गई।

चोरी से कर रहा था काम

थानेदार ने बताया कि रिटायर होने के बाद भी वह चोरी छुपे विवि के वित्त शाखा में काम कर रहा था। IO ने डिस्टेंस एजुकेशन के एक पदाधिकारी पर उसे गलत तरीके से बहाल करने की बात कही है। वहीं जब इस मामले को लेकर रजिस्ट्रार RK ठाकुर से दैनिक भास्कर ने बात की और पूछा कि आरोपी को कैसे कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। गिरफ्तारी हुई है। इसकी भी जानकारी नहीं है। देखते हैं क्या मामला है।

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