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नतीजे चौंकानेवाले, कई सेनापतियों के साथ-साथ दिग्गज रण में हारे

नतीजे चौंकानेवाले, कई सेनापतियों के साथ-साथ दिग्गज रण में हारे

हरि वर्मा
नई दिल्ली। पांच में से चार राज्यों में भाजपा की डबल-डबल होली मन गई। हालांकि, चुनाव नतीजे दिग्गजों के लिए कई नजरिये से बेहद चौंकानेवाले साबित हुए। कई दिग्गजों की होली बदरंग हो गई। ऐन चुनाव से पहले पंजाब और उत्तराखंड में कांग्रेस व भाजपा ने जिन्हें सेनापति बनाकर सियासी रण में उतारा, वे ही खुद जंग हार गए।

उत्तराखंड में भाजपा ने पुष्कर धामी को चुनाव की बागडोर थमाई थी। धामी चुनाव हार गए। यह दीगर है कि उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। एक्जिट पोल में उत्तराखंड में भाजपा की वापसी को लेकर संशय के बादल थे लेकिन धामी के मुकाबले कांग्रेस के हरीश रावत भी चुनाव हार गए। उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर भी काफी ज्यादा का हो गया। उत्तराखंड में भाजपा की जीत में सीडीएस विपिन रावत का हादसा भी एक कड़ी के तौर पर जुड़ गया। रावत की शहादत को भाजपा और प्रधानमत्री ने राष्ट्रवाद से जोड़कर विपक्ष को घेरा। विपक्ष द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सेना और सैनिक पर सवाल उठाने को सैनिकों का अपमान बताया। उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वीरों की धरती भी है।

इसी तरह, पंजाब में कैप्टन अमरिंदर की जगह कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी। उन्हें ही सीएम का चेहरा भी घोषित किया। चन्नी दो सीटों से मैदान में थे। एक पर भी जीत नहीं पाए। इतना ही नहीं 77 सीटों वाली कांग्रेस का बेहद निराशानजक प्रदर्शन रहा। इस निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे कांग्रेस की अंदरुनी धींगामुश्ती बड़ी वजह रही। आपसी खींचतान में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस से किनारा करने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह भी भाजपा के साथ के बावजूद खुद अपनी सीट नहीं बचा पाए।

पंजाब में सिर्फ सीएम चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू या पूर्व सीएम कैप्टन ही नहीं बल्कि प्रकाश सिंह बादल और सुखवीर बादल जैसे दिग्गज भी हार गए। ये सभी किसान आंदोलन के समर्थक भी थे। अकाली दल ने बकायदा भाजपा व एनडीए का साथ भी छोड़ दिया था। जब चन्नी को कांग्रेस ने सेनापति बनाया तो इसे मास्टर स्ट्रोक माना गया। पहली बार राज्य में दलित सीएम का हवाला दिया। हालांकि, चन्नी के सीएम बनते ही सिद्धू का बड़बोलापन पार्टी के लिए घातक साबित हुआ। खुद सिद्दू ने कहा भी था कि कांग्रेस को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती है। नतीजा सामने है। चन्नी ने सत्ता संभालने के बाद आम आदमी पार्टी की चुनौतियों को भांप लिया था। यही वजह थी उन्होंने ताबड़तोड़ बिजली बिल माफी, किसान बिजली बिल व कर्ज माफी जैसे बड़े फैसले लिए। हाल के दो-तीन महीनों से पंजाब में इन फैसलों से लोगों को लाभ भी मिला लेकिन वह भरोसा नहीं जीत पाए। आम आदमी पार्टी ने इसे भरोसे में बदला। आम आदमी को फायदा सामने है।

बात यूपी की। जिस स्वामी प्रसाद मौर्य को शामिल कराकर सपा ने शुरुआती जीत जैसा माहौल बनाया,उसी स्वामी प्रसाद को अपनी सीट बदलनी पड़ी। वह खुद हार गए। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय लल्लू हार गए। योगी आदित्यनाथ के बजाय कमल पर लड़ने की बात करने वाले योगी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हार गए। इतना ही नहीं योगी सरकार के मंत्रियों में आनंद स्वरुप, सतीश चंद्र द्विवेदी, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, सुरेश राणा आदि को शिकस्त मिली। गोवा में चर्चिल हार गए। कई दिग्गजों ने तो आखिरी चुनाव का हवाला भी दिया था लेकिन उनके प्रति मतदाताओं की सहानुभूति नहीं झलकी।

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