बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का आज चौथा दिन है. गुरुवार को चौथे दिन विधानसभा में बिहार में मेडिकल की महंगी फीस और रोजगार का मुद्दा जोर-शोर से उठा. लेफ्ट विधायक मनोज मंजिल ने रोजगार का मुद्दा उठाया वहीं जदयू के विधायक ने बिहार में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों से वसूली जा रही महंगी फीस का मामला उठाया. मेडिकल फ़ीस वाले मामले पर सीएम नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री ने भी जवाब दिया.
बिहार विधानसभा में विधायक मनोज मंजिल ने कहा कि बिहार में साढ़े तीन लाख पद खाली हैं. जबकि तीन साल में सिर्फ 37 हजार शिक्षकों की बहाली हुई है. उन्होंने कहा कि बिहार की तरह केंद्र में भी 8 लाख 27 हजार पद खाली हैं. इससे पहले सदन में ध्यानाकर्षण के तहत जदयू विधायक डॉ संजीव कुमार समेत अन्य सदस्यों की तरफ से प्राइवेट कॉलेजों में महंगी फीस का मुद्दा उठाया गया.
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि लेकिन यह भी सच है कि मेडिकल और इस तरह की पढ़ाई को लेकर जो भी स्ट्रक्चर तय होता है, वह केंद्र सरकार की तरफ से तय किया जाता है. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि यह बात भी सामने आयी है कि यूक्रेन में देश से सस्ती मेडिकल की पढ़ाई होती है. अगर ऐसा है तो केंद्र सरकार को इसे देखना चाहिए. इसके बाद सभी दलों के विधायकों ने कहा कि सरकार को इस मामले में कोई ठोस पहल करनी चाहिए.
बता दें कि बिहार में लगभग 46 हजार से ज्यादा शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अब एक और बड़ी बहाली होने जा रही है. बिहार लोक सेवा आयोग ने प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन तैयार कर शिक्षा विभाग को भेज दिया है. दरअसल 46927 प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक की नियुक्ति को लेकर शिक्षा विभाग और बिहार लोक सेवा आयोग के बीच सहमति बन गई है. अप्रैल से प्रदेश के प्रारंभिक विद्यालयों में 40,506 प्रधान शिक्षकों और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 6421 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा.



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