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महाशिवरात्रि स्पेशल, जानिए बेतिया के पोखरा शिव मंदिर की कहानी, थाईलैंड से मंगाया जाता है फूल

बेतिया शहर के बीचो-बीच स्थापित ऐतिहासिक सागर पोखरा शिव मंदिर का नाम सिर्फ जिले ही नहीं। बल्कि पूरे बिहार में है। यहां स्थापित महादेव और माता पार्वती में लोगों की अपार आस्था है। महाशिवरात्रि के मौके पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। इस बार बाबा भोले के श्रंगार के लिए थाईलैंड से फूल मंगाया गया है। इससे ही भोलेनाथ के साथ पार्वती का श्रंगार किया जाता है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं सदी में बेतिया राजघराने की ओर से किया गया था।

शिव-पार्वती की निकलती है बारात।

शिव-पार्वती की निकलती है बारात।

इसलिए नाम पड़ा सागर पोखरा
मंदिर के निर्माण के लिए विंध्याचल और राजस्थान से दुर्लभ पत्थर मंगाए गए थे। कारीगर भी बाहर से ही आए थे। पत्थरों पर नक्काशी शिल्पकला का अदभुत उदाहरण है। भव्य मंदिर के सामने विशाल तालाब भी राजा की ओर से खुदवाया गया था। लोगों का मानना है कि इस पोखरे में सात समंदर से पवित्र जल लाकर तालाब में गिराया गया था। यही कारण है कि इसका नाम सागर पोखरा शिव पार्वती के रूप में हुआ।

हर भक्त की पूरी होती है मुराद

मंदिर में दिव्य शिवलिंग के अलावा भोलेनाथ और माता पार्वती की एक साथ प्रतिमा है। साथ ही माता पार्वती का शक्ति रूप अलग की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में माता दुर्गा भी ममतामयी करूणामयी रूप में विराजमान है। सावन और शारदीय नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। लेकिन, महाशिवरात्रि पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। मंदिर के पुजारी रविन्द्र कुमार झा ने बताया कि सच्चे दिल से मांगी गयी मुराद यहां पूरी होती है। कोई भी यहां से निराश नहीं लौटता है।

भगवान भोलेनाथ की निकलती है बारात
पूजा समिति के सदस्य सुधांशु कुमार ने बताया कि शिवरात्रि में शिव पार्वती के पूजन के लिए थाईलैंड से फूल मंगवाया जाता है। भगवान के श्रंगार के लिए एक ट्रक फूल लाया जाता है। सजावट के बाद शिव जी की बारात निकलती। पूरे बेतिया शहर घुमने के बाद शादी होती है। इसमें तरह-तरह की झांकियां दिखाई जाती है। इसके लिए मुंबई और कोलकाता से कलाकार आते हैं।

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