देर रात 1 बजे टरनोपिल स्टेशन से कीव के लिए ट्रेन पकड़ी। तीन दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद तीन गुना पैसे देकर फ्लाइट का टिकट लिया था। इस बात की खुशी थी कि घर वापस पहुंच जाएंगे। फ्लाइट कीव से दुबई के लिए जानी थी। लेकिन ये नहीं पता था कि कीव में ही हम दोनों फंस जाएंगे। ये बातें यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे बिहार के मोतिहारी निवासी दीपक कुमार और रक्सौल निवासी रजत रोशन ने बताईं। दोनों टरनोपिल मेडिकल कॉलेज, यूक्रेन में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। रूम मेट भी हैं। इसलिए साथ घर लौटने की तैयारी में थे।
सुबह फ्लाइट कैंसिल होने का आया मैसेज
दीपक ने बताया कि देर रात जब स्टेशन से ट्रेन खुली तो जल्द घर पहुंचने के लिए उत्सुक था। ट्रेन को सुबह कीव पहुंचा देना था। लेकिन, देर रात से ट्रेन को बार-बार रोकना पड़ रहा था। जब सुबह नींद खुली तो मोबाइल पर मैसेज देखा कि फ्लाइट कैंसिल हो गई है। जब न्यूज देखा तो पता चला कि रशियन आर्मी ने एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया है। वहीं, सारी फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। दोपहर में 1 बजे के आसपास ट्रेन कीव पहुंची। अभी सभी को स्टेशन पर ही रोका गया है। आगे पता नहीं क्या होने वाला है। कई जगहों से बम विस्फोट का विजुअल देख मन घबरा रहा है।

यूक्रेन में फंसे बिहारी छात्र दीपक(हेडफोन लगाए) और रजत रौशन(हाथ में फोन लिए)।
दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर थी दुबई के लिए फ्लाइट
22 फरवरी को बहुत मुश्किल से एयर दुबई की फ्लाइट का टिकट मिला। जो टिकट अमूमन 22 हजार में मिलता था। उसका 66 हजार रुपए भुगतान करना पड़ा। लेकिन, जब टिकट कंफर्म मिल गया तो खुशी हुई कि अब देश लौट जाऊंगा। कीव से गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर फ्लाइट थी। यह रात 10 बजे दुबई पहुंचती। वहीं, दुबई से 25 फरवरी को सुबह 4 बजकर 10 मिनट फ्लाइट थी जो नई दिल्ली छोड़ देती। अभी कीव स्टेशन पर फंसे हुए हैं। किसी तरह कॉलेज लौटने का उपाय ढूंढ़ रहे हैं। स्टेशन पर यूक्रेन के लोकल निवासी न के बराबर हैं। वहीं, सैकड़ों भारतीय छात्र अलग-अलग शहर से फ्लाइट पकड़ने के लिए पहुंचे हुए हैं।
डरे हुए हैं दोनों के परिजन
दीपक ने बताया कि वह मोतिहारी के मधुबन के रहने वाले हैं। वहीं, उनके पिता पवन चौरसिया होम्यौपैथिक डॉक्टर हैं। जबकि बड़े भाई की मोतिहारी में ही इलेक्ट्रॉनिक दुकान है। वहीं, दोनों बहनें सरकारी एग्जाम की तैयारी में लगी हैं एवं मां गृहिणी हैं। सारा परिवार बहुत डरा हुआ है। वहीं, रजत रौशन ने बताया कि वह रक्सौल के निवासी हैं। उनके पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं। पिछले 15 दिनों से परिवार बहुत विचलित है। उनसे बात होने पर उनका हिम्मत बढ़ा रहा हूं लेकिन खुद भी अब डर लग रहा है।



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