नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व एनआरसी के विरोध में कई दिनों से चल रहा ध’रना प्रद’र्शन रविवार को और बढ़ गया। यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। इन लोगों की मांग है कि धर’ना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खु’लवाई जाए। धर’ना स्थल से 200 मीटर की दूरी पर लोग ड’ट गए हैं। प्रदर्शनकारियों के सामने प्र’दर्शन होने से वहां हल्का त’नाव हो गया है। हालांकि पुलिस बलों की संख्या बढ़ाई गई है। कई बसों में भरकर लोगों को पुलिस ध’रना स्थल से दूर ले जा रही है। डीसीपी चिनमय ने बताया कि किसी भी प्रदर्शन को शाहीन बाग में जहां प्रदर्शन चल रहा है वहां आसपास इजाजत नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग प्र’दर्शन कर रह हैं। इसलिए उन्हें हि’रासत में लिया गया है।इससे पहले शाहीन बाग में चल रहे धर’ने के वि’रोध में भी शनिवार को स्थानीय लोग धरने पर बैठ गए थे।


वे प्रदर्शनकारियों को ह’टाने की मांग कर रहे थे। यहां एक हफ्ते से यह धर’ना चल रहा है। हालांकि शाहीन बाग धरने के वि’रोध में ध’रने पर बैठे लोगों को पुलिस बार-बार हटा दे रही है।शनिवार को भी झारखंड से आए संतन सिंह 30-40 लोगों के साथ ध’रने पर बैठे थे। धरना स्थल की बैरिके¨डग के पास जसोला रेडलाइट पर ध’रना देने वालों में स्थानीय लोग भी शामिल थे। यहां गो’ली चलने की खबर फैलते ही लोगों की संख्या बढ़ गई। धरने में करीब 100 से ज्यादा लोग जुट गए तो पुलिस के भी हाथपांव फूल गए। दोनों पक्षों में कहीं टक’राव न हो जाए और कानून-व्यवस्था न बि’गड़ जाए, इस आशंका में पुलिस ने इन लोगों को काफी अनु’रोध कर यहां से जाने के लिए कहा। पुलिस के काफी समझाने पर लोग माने और शाम सात बजे धर’ना स्थल से चले गए। एहतियात के तौर पर मौके पर भारी संख्या में पुलिस व सुर’क्षाबलों के जवानों को तैना’त किया गया है।


काम पर आने-जाने में परे’शानी होती है
ध’रने पर बैठे लोगों का कहना था कि वे लोग नौकरीपेशा हैं और शाहीन बाग धरने के कारण उन्हें अपने काम पर आने-जाने में परेशानी होती है। ज्यादा किराया व ईंधन के साथ ही अधिक समय भी लगता है। कोई बीमा’र हो जाए तो मरी’ज को अस्पताल भी नहीं पहुंचाया जा सकता है। ऐसे में गं’भीर रूप से बीमा’र व्यक्ति की मौ’त तक हो सकती है। सरिता विहार निवासी पवन पांडेय ने बताया कि वह नोएडा में नौकरी करते हैं। आश्रम होते हुए नोएडा जाने में पांच घंटे लग जाते हैं। इस कारण वह डेढ़ माह से छुट्टी पर हैं। मदनपुर खादर गांव में तो जाम के कारण इतना बु’रा हाल है कि लोग अपने घरों से नहीं निकल पा रहे हैं।



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