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लालू यादव को हो सकती है जेल! जानें…

15 फरवरी को लालू यादव की रांची में डोरंडा कोषागार मामले पर सुनवाई होनी है। यह मामला उन तमाम केसों की तरह है, जिनमें लालू यादव ने सजा पाई हुई है और अभी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं। डोरंडा कोषागार मामले में पुराने केसों का रेफरेंस लेते हुए सुनवाई की जाएगी।

कानून के जानकार बताते हैं कि डोरंडा मामले में भी लालू यादव को सजा हो सकती है और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। फिलहाल लालू यादव रांची पहुंच चुके हैं और अपने केस की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ चर्चा शुरू हो गई कि एक बार फिर से लालू यादव अगर जेल जाते हैं तो राजनीतिक रूप से उनके दल RJD और उनके परिवार पर क्या असर पड़ेगा?

परिवार को भी पक्ष में फैसले की उम्मीद कम
वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडे बताते हैं कि लालू यादव पहली बार जेल नहीं जा रहे हैं। 3 साल जेल में रहकर आए हैं। उनके जेल जाने को लेकर परिवार भी अभ्यस्त हो चुका है। डोरंडा मामले में फैसला लालू यादव के पक्ष में आएगा, उनको भी इसकी उम्मीद कम है। इसी तरह के 4 केसों में उनको सजा हो चुकी है। अब इस केस में सजा राशि को देखकर होता है या फिर उसके दायरे को देखकर होता है, यह कोर्ट को तय करना है। क्योंकि चारा घोटाले की बुनियाद इसी डोरंडा कोषागार को माना जाता है। क्योंकि सबसे बड़ी राशि इसी डोरंडा कोषागार से निकाली गई थी।

कोर्ट क्या फैसला लेता है यह अलग बात है, लेकिन मुझे लगता है कि इस केस में उन्हें राहत नहीं मिलेगी। अब इस केस में उन को कितनी सजा मिलती है यह कोर्ट तय करेगा क्योंकि मैक्सिमम इस केस में 7 साल की सजा है और उन्होंने तीन साढे 3 साल की सजा काट ली है। अब इस पर क्या फैसला होता है उनके पक्ष में फैसला आता है या विपक्ष में फैसला आता है यह कोर्ट तय करेगा। कल जो सुनवाई होनी है उसमें उन्हें दोषी करार दिया जा सकता है और चार-पांच दिन के बाद उन्हें सजा सुनाई जाएगी। तब तक उन्हें कस्टडी में रहना होगा और यही सेटबैक होगा उनके परिवार के लिए।

कार्यकर्ताओं पर पड़ता है लालू के बाहर रहने का असर
अरुण पांडेय बताते हैं कि हालांकि लालू यादव लगातार यह कहते रहे हैं कि न्यायालय पर भरोसा है। रही बात लालू यादव की राजनीतिक विरासत की तो तेजस्वी यादव ने संभाल ली है। लेकिन, लालू यादव के जेल से बाहर रहने और जेल के अंदर रहने में बहुत फर्क नहीं पड़ता है। लालू यादव के बाहर रहने पर जो उनके कार्यकर्ता हैं वह काफी उत्साहित रहते हैं। लालू यादव सभा में या दफ्तर में जाते हैं तो उनके कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखता है। क्योंकि, लालू यादव RJD की धुरी हैं। हालांकि, अब उनके स्वास्थ्य और और एक्टिविनेस ज्यादा नहीं है। लालू यादव पहले की तरह नहीं हो सकते हैं।

लेकिन, अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए उन्होंने जरूर कहा है कि वह फिर से एक्टिव होंगे, और चुनाव लड़ेंगे। यह उत्साह भरने की बात थी, जो लालू जी ने कहा था। RJD अभी सबसे बड़ी पार्टी है बिहार की राजनीति में RJD और NDA दो धुरी हैं। NDA सत्ता में हैं। लालू यादव जेल जाते हैं तो भी उनको कोई असर नहीं पड़ने वाला है और तेजस्वी यादव ने लालू यादव के गैर हाजिरी में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है तो बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, लालू यादव जेल से बाहर रहते हैं तो उनके कार्यकर्ता उत्साहित रहते हैं और एक्टिव रहते हैं।

139 करोड़ रुपए की अवैध निकासी में 102 लोग फेस कर रहे हैं ट्रायल
कल यानी 15 फरवरी को लालू प्रसाद समेत 102 आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपए की अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद समेत 102 लोग ट्रायल फेस कर रहे हैं । हालांकि आरोपियों की ओर से बहस पूरी होने के बाद भी दो तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। सीबीआई ने 1996 में अलग-अलग कोषागारों से गलत ढंग से अलग-अलग राशियों की निकासी को लेकर 53 मुकदमे दर्ज किए थे। ये रुपयों को संदिग्‍ध रूप से पशुओं और उनके चारे पर खर्च होना बताया गया था। उन 53 मामलों में से यह मामला आरसी 47 (ए)/ 96 सबसे बड़ा जिसमें सर्वाधिक 170 आरोपित शामिल हैं। इस मामले में सर्वाधिक 139 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि की अवैध निकासी की गई थी। मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों की संख्‍या भी सबसे अधिक 585 है।

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