अंतिम दर्शन के लिए मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क में रखा जाएगा. शाम करीब 6:30 पूरे राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार (Lata Mangeshkar Funeral) किया जाएगा. लता मंगेशकर का रविवार सुबह यहां ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें 8 जनवरी को दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती (Lata Mangeshkar passes away) कराया गया था.
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राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
ट्रक में पार्थिव शरीर के साथ मंगेशकर की बहन और नामी गायिका आशा भोसले सहित उनके परिवार के कुछ सदस्य थे. इस मौके पर महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे. सेना, पुलिस जीप की सुरक्षा में ट्रक हाजी अली जंक्शन, वर्ली नाका, पोद्दार अस्पताल चौक, पुराना पासपोर्ट कार्यालय, सिद्धिविनायक मंदिर, कैडल रोड से होकर गुजरेगा और बाद में दादर के शिवाजी पार्क में पहुंचेगा, जहां गायिका का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा.
तिरंगे में लिपटी लता मंगेशकर की अंतिम यात्रा शुरू
तिरंगे में लिपटी गायिका लता मंगेशकर के पार्थिव शरीर को एक ट्रक से अंतिम संस्कार के लिए रविवार शाम दक्षिण मुंबई में उनके आवास से दादर के शिवाजी पार्क में ले जाया गया. सुर साम्राज्ञी जब अपनी अंतिम यात्रा पर निकलीं तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े और काफिला आगे बढ़ता गया. पुलिस और सेना ने मंगेशकर को औपचारिक सलामी दी और एक बैंड ने राष्ट्रगान बजाया. इसके बाद लता मंगेशकर के पार्थिव शरीर को फूलों से सजे ट्रक में रखा गया और उसमें गायिका की एक विशाल तस्वीर भी रखी गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महान गायिका लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में शामिल होने मुंबई पहुंचे.
लता मंगेशकर के निधन पर मनमोहन सिंह बोले, भारत ने अपनी एक महान बेटी को खो दिया
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लता मंगेशकर को ‘भारत की कोकिला’ बताया और कहा कि भारत ने अपनी महान बेटी को खो दिया है. महान गायिका के निधन पर शोक प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि उनका देहावसान राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा नुकसान है और इस रिक्तता को भर पाना असंभव है. सिंह ने अपने शोक संदेश में कहा, “मुझे लता मंगेशकर के निधन की खबर पाकर बहुत दुख हुआ. भारत ने अपनी एक महान बेटी को खो दिया है. वह ‘भारत की कोकिला’ थीं और अपने गानों से देश की सांस्कृतिक एकीकरण में गहरा योगदान दिया.”
महाराष्ट्र में 7 फरवरी को सार्वजनिक अवकाश, तो बंगाल में आधे दिन की छुट्टी
भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 7 फरवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से यह जानकारी दी गई है. दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ऐलान किया है कि राज्य सरकार गायिका लता मंगेशकर के निधन के शोक में 7 फरवरी को आधे दिन का अवकाश मनाएगी.

नेपाल की राष्ट्रपति ने जताया लता मंगेशकर के निधन पर शोक
नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा, “कई नेपाली गीतों को अपनी सुरीली आवाज से सजा चुकीं प्रसिद्ध भारतीय गायिका लता मंगेशकर के निधन की खबर से दुखी हूं. असाधारण प्रतिभा की धनी स्वर्गीय लता मंगेशकर को मैं भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं.”
लताजी सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि भारत की चेतना का हिस्सा थीं: ए आर रहमान
मशहूर संगीतकार ए आर रहमान ने सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्होंने उनके साथ गाने रिकॉर्ड किए और उनके साथ गाया तथा उनसे रियाज का महत्व सीखा. रहमान ने कहा, “यह हम सभी के लिए बहुत दुखद दिन है. लताजी सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, न केवल एक प्रतीक, बल्कि भारत की चेतना, भारतीयता, हिंदुस्तानी संगीत, उर्दू और हिंदी कविता का हिस्सा थीं. उन्होंने कई भाषाओं में गीत गाए. हम सभी के लिए यह खालीपन हमेशा बना रहेगा.
संगीतकार मिलिंद ने कहा, मां सरस्वती का अवतार थीं लता मंगेशकर
दिग्गज गायिका लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए संगीतकार मिलिंद ने कहा कि उनका और उनके घर का नाम मंगेशकर ने रखा था और उनके परिवार के उनसे निकट संबंध थे. अपने बड़े भाई आनंद के साथ मिलकर आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ का संगीत बनाने वाले मिलिंद ने बताया कि मंगेशकर ने उनके पिता एवं संगीतकार चित्रगुप्त से कहा था कि वह उनके बेटे का नाम रखना चाहती हैं. मिलिंद (62) ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “वह मां सरस्वती का अवतार थीं.”
लता मंगेशकर का निधन हर किसी का व्यक्तिगत नुकसान है: अनुराग ठाकुर
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि महान गायिका लता मंगेशकर का निधन हर किसी का व्यक्तिगत नुकसान है और उनकी आवाज अमर रहेगी. ठाकुर ने ट्वीट में कहा, “स्वर कोकिला, सुर साम्राज्ञाी लता जी का निधन ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई असंभव है. उनका जाना हर किसी का व्यक्तिगत नुकसान है. निजी तौर पर वह मेरी सबसे पसंदीदा गायिका थीं, जिन्होंने उम्र के हर पड़ाव पर अपने गायन से मुझ जैसे अनगिनत लोगों को प्रभावित किया.”



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