संपूर्ण भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपनी मान्यताओं के चलते भक्तों के दिलों में आस्था की दिव्य अलख जगाते हैं। कई तो ऐसे मंदिर हैं जहां केवल मत्था टिकाने से मुरादें पूरी हो जाती हैं। तो कहीं पर लोग चिट्ठियों में अपनी मन्नतें पूरी होने की अर्जी लगाते हैं। इन अद्भुत मंदिरों की श्रेणी में से एक है देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में स्थापित मां लक्ष्मी का मंदिर। यहां तो महज एक सिक्के से ही धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं। यही नहीं यहां देवी के दर्शनों के लिए लोग प्रात: बेला के बजाए रात्रि के प्रहर में अधिकाधिक संख्या में पहुंचते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं…..मंदिर को लेकर अंग्रेजी शासन के दौरान का उल्लेख मिलता है। जानकारी मिलती है कि उस दौरान मुंबई में वर्ली और मालाबार हिल को जोड़ने के लिए दीवार बनाने का कार्य चल रहा था। इस निर्माण कार्य में सैकड़ों मजदूर लगे थे ताकि कहीं भी किसी भी तरह की कोई परेशानी न आए और दीवार का कार्य जल्दी से जल्दी पूरा कराया जा सके। लेकिन बावजूद इसके दीवार बन ही नहीं पा रही थी।

कई बार तो यहां तक हुआ कि दीवार पूरी बनने के बाद ढह जाती। इसे लेकर ब्रिटिश इंजीनियर्स काफी परेशान हो गये। उन्हें कोई रास्ता ही नहीं सूझ रहा था कि आखिर कैसे इस दीवार का काम पूरा कराया जा सके।मुंबई के भूलाभाई देसाई मार्ग पर समुद्र किनारे स्थित माता लक्ष्मी मंदिर की प्रतिमा स्वयंभू है। कहानी मिलती है कि जब ब्रिटिश इंजीनियर्स काफी परेशान हो गये तो एक दिन उस प्रॉजेक्ट के चीफ इंजीनियर को माता लक्ष्मी ने सपने में दर्शन दिये। बताया जाता है कि मां ने उन्हें सपने में कहा कि वर्ली में समुद्र किनारे उनकी एक मूर्ति है। उसे निकालकर समुद्र के किनारे ही मेरी स्थापना करो। मां ने आगे कहा कि यदि वह ऐसा करेंगे तो वर्ली-मालाबार हिल के बीच की दीवार आसानी से खड़ी हो जाएगी।बताया जाता है कि जब चीफ इंजीनियर की नींद खुली तो पहले तो उसे अपने सपने पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब वह दीवार के बारे में विचार करता तो उसे लगता कि क्यों न एक बार वह सपने में बताये गए स्थान पर जाकर देख ले। पूरा दिन इसी उधेड़बुन में बीत गया। शाम होते-होते उसने कामगारों को सपने में बताये गए स्थान पर जाकर मां की मूर्ति ढूढ़ने को कहा। कहा जाता है कि कुछ ही समय बाद कामगारों को मां की मूर्ति मिल गई। वह उसे लेकर चीफ इंजीनियर के पास पहुंचे। मां की मूर्ति देखते ही वह भाव विभोर हो उठा। इसके बाद उसने मां की प्रतिमा को प्रणाम किया।

प्रतिमा मिलने के बाद चीफ इंजीनियर ने सपने में मां के द्वारा बताए गये स्थान पर मूर्ति की स्थापना करवाकर एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया। कहा जाता है उसके बाद वर्ली और मालाबार हिल को जोड़ने वाली दीवार आसानी से बन गई। इसके बाद मंदिर को लेकर आस-पास के भक्तों में आस्था बढ़ती गई। अब देश के कोने-कोने से श्रद्धालु माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्जी लगाने पहुंचते हैं।महालक्ष्मी मंदिर की खास बात यह है कि यहां भक्तों की मन्नतें महज एक सिक्के से ही पूरी हो जाती हैं। मंदिर को लेकर आस्था है कि यहां मन्नत मांगकर सिक्का चिपकाने से जो भी मांगा जाए वह पूरा हो जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां दीवार पर सिक्के चिपकाने के लिए किसी तरह के ग्लू की जरूरत नहीं होती। सिक्के अपने आप ही चिपक जाते हैं।




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