नई दिल्ली: भारत में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से आई तीसरी लहर में कोविड केस में भारी उछाल देखने को मिला. मौजूदा समय में देश में हर दिन कोरोना के लाखों मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि कोविड के यह मामले डेल्टा वेरिएंट के संक्रमण की तुलना में काफी कम हैं. डेल्टा वेरिएंट से देश में करीब साढ़े चार लाख केस एक दिन में देखने को मिले थे. वैज्ञानिक इस बात की भी रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन की वजह से भारत में स्थित क्यों ज्यादा खराब नहीं हुई है. अब इस बारे में एक्सपर्ट ने अपनी राय दी है.
गौरतलब है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट की तुलना में कई गुना अधिक तेजी से फैलता है लेकिन तीसरी लहर में संक्रमण के मामले दूसरी लहर की तुलना में कम दिखे और हॉस्पिटलाइजेशन के मामले भी काफी कम आ रहे हैं.
अमेरिका के इंफेक्शन डिसीज एक्सपर्ट और मैरीलैंड यूसीएच विश्वविद्यालय के वाइस प्रेसिंटेड डॉक्टर फहीम यूनूस ने कहा कि भारत में ओमिक्रॉन का असर कम हुआ इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वैक्सीनेशन है.

फहीम यूनुस ने कहा कि कम उम्र के लोगों में वैक्सीनेशन से इम्यूनिटी बनने की वजह से पिछली लहर की तुलना में इस बार कम नुकसान हुआ. एक्सपर्ट ने कहा कि इम्यूनिटी सिस्टम को दो बार चकमा देना वायरल के लिए बहुत मुश्किल काम है.
पिछले साल के सितंबर महीने के ग्राफ की तुलना करते हुए डॉ. यूनुस ने एक ट्वीट में कहा कि भारत और पाकिस्तान में तीसरी लहर में मामले बढ़ रहे हैं लेकिन इस बार अस्पातल में भर्ती होने और संक्रमण से मरने वालों की संख्या पिछले साल के मुकाबले काफी कम है. उन्होंने कम औसत आयु, सही समय पर वैक्सीनेशन से इम्यूनिटी बनने और कोविड की पिछली लहर इसके मुख्य कारक हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अभी हमें चार और हफ्तों का इंतजार करना होगा. लेकिन कोई भी वायरस इम्यून सिस्टम को दो बार चकमा नहीं दे सकता.



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