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मोदी सरकार कर रही है भारत में सस्ती दवा बनाने की तैयारी, जानें क्या है प्लान

भारत में दवाओं को सुलभ और सस्ता बनाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कम से कम 10 देशों की दवा मूल्य निर्धारण नीतियों पर एक अध्ययन शुरू करने के लिए तैयार है. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत आने वाले फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) ने एक प्रतिष्ठित कंपनी की तलाश में एक टेंडर निकाला है जो सरकार की ओर से यह अध्ययन कर सकती है.

रिसर्च का मकसद कम-से-कम 10 देशों को कवर करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनाई गई दवा मूल्य निर्धारण पद्धति को समझना है. इसका एक अन्य उद्देश्य दवा की उपलब्धता और सुलभता के संदर्भ में विभिन्न देशों (या क्षेत्रों) से सीखे गए सबक या सर्वोत्तम प्रथाओं को समझना भी है.

एनपीपीए को मिला ये जिम्मा

एक निजी चैनल द्वारा एक्सेस किए गए ‘नोटिस इनवाइटिंग टेंडर्स’ लेबल वाले रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) डॉक्युमेंट के अनुसार, ड्रग प्राइसिंग वॉचडॉग नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) एक स्टडी करने के लिए प्रतिष्ठित फर्मों या शोध संस्थानों को शामिल करना चाहता है. एनपीपीए दरअसल फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) की एक शाखा है.

12 फरवरी तक फर्म पेश कर सकते हैं अपना प्रपोजल
डॉक्युमेंट के टाइटल में लिखा है “विभिन्न देशों/क्षेत्रों की दवा मूल्य निर्धारण नीतियों और इन देशों/क्षेत्रों से सीखे गए सबक का अध्ययन करने के लिए सस्ती कीमतों पर दवा तक पहुंच के संदर्भ में”. प्रतिष्ठित फर्मों या शोध संस्थानों द्वारा प्रस्ताव को पेश करने की समय-सीमा 12 फरवरी है, जबकि शॉर्टलिस्ट किए गए कंपनियों को 1 मार्च को प्रस्तुतिकरण के लिए बुलाया जाएगा.

अध्ययन में माध्यमिक स्रोत शामिल होंगे, शीर्ष 10 देश चुने गए
डॉक्युमेंट के अनुसार, सरकार कम से कम 10 देशों (या क्षेत्रों) के दवा मूल्य निर्धारण पर नियामक नीति या ढांचे का अध्ययन करने की योजना बना रही है. इतना ही नहीं, अन्य नीतिगत पहलुओं का अध्ययन करने के अलावा विभिन्न देशों में दवा मूल्य निर्धारण नीतियों के परिचालन कार्यान्वयन का अध्ययन करने की भी योजना है जो इन देशों में दवा की उपलब्धता और सुलभता को प्रभावित करते हैं

डॉक्युमेंट में कहा गया है, “कम से कम दस देश/क्षेत्र जिन्हें कवर किया जाना चाहिए, वे हैं श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन, यूरोपीय संघ, यूके, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड.”

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