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अब और बढ़ेगी महंगाई; 40 फीसदी तक बढ़ेंगे आलू, रोटी-दाल, तेल, गुड़ और चीनी के भी भाव

जिले में अत्यधिक बारिश, बाढ़ और खेतों में जलजमाव के कारण इस साल रबी फसलें तय लक्ष्य से कम रकबा में लग पाईं हैं। पांच जनवरी बुआई का अंतिम समय बीतने के बाद भी खेतों में पानी जमा है। ऐसे में पछेती खेती के कारण किसानों पर आर्थिक बाेझ बढ़ रहा है। कम रकबा और पछेती खेती के कारण पैदावार कम हाेना भी तय है।

इसका असर एक ओर तत्काल किसानों पर पड़ रहा है, दूसरी ओर आम लाेगाें की जिंदगी पर भी सीधा पड़ेगा। असर आने वाले दिनाें में महंगाई के रूप में दिखेगा। महंगी दर पर आलू, गेहूं-आटा, दाल, तेल और मक्का आदि खरीदनी पड़ेगी। मवेशियाें-पशुओ के लिए चारे यानी भूसा और चोकर आदि ऊंचे दाम पर मिलना लाजिमी है। क्याेंकि, ये सामग्री दूसरे प्रदेशों से मंगवानी हाेगी। दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट में पढ़िए किसानों के सामने क्षति की भरपाई के लिए क्या विकल्प हैं और आम जिंदगी किस तरह

महंगाई से प्रभावित हाे सकती है।
30 से 40 प्रतिशत तक कम हाेगी पैदावार : एक लाख 43 हजार 802 हेक्टेयर में मक्का, राई/सरसाें, आलू, गेहूं, मसूर, खेसारी, तीसी, गन्ना, तंबाकू, जाै समेत अन्य तेलहनी-दलहनी फसलाें की खेती हाेनी थी। लेकिन, एक लाख 11 हजार 624 हेक्टेयर में ही हाे पाई। 32 हजार 178 हेक्टेयर खेत खाली रह गए। गेहूं, मक्का, सरसों और मसूर के साथ आलू की पैदावार भी 60 से 70 फीसदी ही हाे पाएगी।

एक्सपर्ट से समझिए… अब कौन सी खेती फायदेमंद और कितनी बढ़ सकती है महंगाई, खाली खेतों में वैकल्पिक फसल लगाएं किसान

अत्यधिक जलजमाव होने से अंतिम समय तक रबी की बुआई हुई है। रबी बुआई का अंतिम समय बीत जाने के बाद भी किसानों ने खेतों से पानी सूखने के बाद गेहूं समेत रबी फसलें बाेई हैं। पछेती खेती से कम उपज के कारण किसानों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। किसानों काे क्षतिपूर्ति के लिए खाली खेत में सब्जियां, मूली, गरमा, मूंग और तिल की फसल लगानी चाहिए। इन फसलाें की पैदावार कम लागत में बेहतर हाेती है। निचली जमीन में कुछ समय बाद बाेराे धान लगा कर धान की बर्बादी की क्षतिपूर्ति भी की जा सकती है। -सुनील शुक्ला, जिला कृषि परामर्शी

जितना उत्पादन घटेगा, कीमत में उतना उछाल तय

30 से 40% क्षेत्र में बुआई नहीं होने से उत्पादन में इतनी कमी निश्चित ही आएगी। मुजफ्फरपुर के साथ समूचे उत्तर बिहार में यही स्थिति है। किसानों की आय घटने से आमदनी घटेगी। पैदावार में कमी से बाजार में आपूर्ति घटेगी। दूसरे प्रदेशों से सामान मंगाने पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत के कारण ट्रांसपोर्टिंग कॉस्ट भी बढ़ेगा। कीमत में उछाल निश्चित है। महंगाई की दोहरी मार तय है। क्योंकि, दूसरे प्रदेशों में भी इस साल अधिक और असमय बारिश हुई है। वहां भी फसलें प्रभावित हाेने से कीमतें बढ़ेंगी। -डॉ. सीकेपी शाही, अर्थशास्त्री

उम्मीद… सब्जियाें के मोर्चे पर राहत

सब्जियों की खेती 734 हेक्टेयर में ही हाेती थी। इस साल 1150 हेक्टेयर में हाे रही है। ऐसे में सब्जियों के भाव में कमी आ सकती है। -(जिला कृषि विभाग से सरकार काे भेजी रिपोर्ट के अनुसार)

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