अब बिहार में क्रिटिकल केयर को लेकर एक्सपर्ट की समस्या नहीं होगी। बिहार में पहली बार क्रिटिकल केयर मेडिसिन की पढ़ाई होगी। इसके लिए NMC ने IGIMS को क्रिटिकल केयर मेडिसिन (CCM) में DM की 3 सीट के लिए दी हरी झंडी दे दी। पटना के IGIMS में 2022 में क्रिटिकल केयर मेडिसिन में डीएम की 3 सीटों पर पढ़ाई होगी। बिहार में पहली बार किसी मेडिकल कॉलेज को यह सीट दी गई।
कोर्स के लिए IGIMS ने बनाया रिकॉर्ड
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ मनीष मंडल ने बताया, ‘IGIMS में 2022 से NMC द्वारा क्रिटिकल केयर मेडिसिन (CCM) में DM की 3 सीटों की अनुमति दी गई है। इसके साथ IGIMS इस कोर्स को शुरू करने वाला बिहार का पहला मेडिकल कॉलेज अस्पताल बन गया है।’


प्रवक्ता डॉ. मनीष मंडल ने बताया, ‘यह कोरोना महामारी के लिए यह काफी अहम होगा। कोरोना महामारी के लिए क्रिटिकल केयर काफी उपयोगी, इसमें एक्सपर्ट की काफी भूमिका होती है। कोरोना के लिए क्रिटिकल केयर के एक्सपर्ट से कोरोना के मरीजों को काफी मदद मिलती है।’
क्रिटिकल केयर से ऐसे होता है इलाज

डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि कोरोना जैसी गंभीर बीमारी में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा विशेष देखभाल की जाती है, जैसे कि वेंटिलेटर या मल्टी ऑर्गन फेल्योर में ऐसे एक्सपर्ट से काफी मदद मिलती है। इस विभाग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रोगी को बचाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाते हैं। IGIMS ऐसे एक्सपर्ट को तैयार करने में बड़ा रोल होगा। इसमें IGIMS बिहार का नेतृत्व करेगा। बिहार में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ भविष्य में खतरनाक बीमारी से पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए वरदान साबित होंगे।
बिहार तैयार करेगा एक्सपर्ट
क्रिटिकल केयर मेडिसिन (CCM) के HOD डॉ. संजीव कुमार ने बताया, ‘अब बिहार में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को तैयार किया जाएगा। जिन्हें बिहार के गंभीर रोगियों को बचाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। उन्हें पूरी तरह से प्रशिक्षित किया जाएगा।’

डॉ. रितु ने बताया, ‘हम इन गंभीर बीमारियों से निपटने में सक्षम बनने के लिए इन छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बिहार में पहली बार यह डिपार्टमेंट को स्टेबलिश किया गया है और इसमें अब डीएम की पढ़ाई होने से बिहार के लोगों और स्टूडेंट्स दोनों को फायदा होगा।’



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