के राशि परिवर्तन से अगले ढाई साल सभी जातकों के लिए उथलपुथल वाले रहने वाले हैं। शानिदेव करीब 29 बाद अपनी मूल राशि मकर में पहुंचे हैं। शनि के इस राशि परिवर्तन से जहां वृषभ और कन्या राशि वाले जातक ढैय्या से मु’क्त होंगे वहीं मिथुन और तुला राशि के जातकों पर ढैय्या का प्र’भाव होगा। मिथुन, तुला और कुम्भ राशि के लिए आने वाले दिन संघर्षपूर्ण रहने वाले हैं। शनि के इस राशि परिवर्तन के बाद अगर आपकी राशि पर भी साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव पड़ने जा रहा है, तो इन आसान तरीकों से आप शनि देव को खुश कर सकते हैं.
– अगर आप साढ़ेसाती से परे’शान हैं तो 1-14 मुखी रुद्राक्ष माला आपको धारण करनी चाहिए। इससे शनिदेव के प्र’कोप से रा’हत मिलेगी। साथ ही इस अवधि में रोज शनिदेव के चरणों का भी दर्शन कीजिए।

– अगर आप आर्थिक संक’ट से जू’झ रहे हैं तो अभी ही नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दें। साथ ही गुरुवार के दिन गाय को आटे के पेड़े पर हल्दी लगाकर खि’लाएं। गुड़ और चने की दाल भी खिलाएं। इससे शनि देव के प्र’कोप से रा’हत मिलेगी।
– नौकरी में परे’शानी आ रही है तो भी प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें। पाठ की शुरुआत शनिवार से ही करें और शुक्रवार को उसका समापन करें।

– विवाह में परे’शानी आ रही है तो गणपति, लक्ष्मी, भैरव और हनुमान जी की अराधना करें। ऐसा करने से शनि दो’ष खत्म होता है और शादी के योग बनते लगते हैं।
– शनि ग्रह को शांत करने के लिए शनिवार को सरसों के तेल का दान करें। साथ ही हनुमान स्रोत, हनुमान मंत्र, हनुमानाष्टक का पाठ भी करें।



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