नई दिल्ली. साल 2020 में कोरोना के संक्रमण (Coronavirus) ने लोगों को हिला कर रख दिया. साल 2021 में वैक्सीन ने लोगों को नई उम्मीदें दी. लेकिन क्या साल 2022 में कोरोना के संक्रमण से लोगों को राहत मिलेगी. ऐसा संभव है. लेकिन लोगों को कोरोना के साथ रहने के लिए सीखना होगा. दुनिया भर में ओमिक्रॉन के चलते तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमारा इम्यून सिस्टम अब धीरे-धीरे कोरोना का मुकाबला करने के लिए तैयार हो रहा है
वैक्सीन विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डॉ गगनदीप कांग ने हमारे सहयोगी चैनल News18 को बताया, ‘लंबे समय तक कोविड के साथ रहने के चलते अधिक से अधिक लोग इसके संक्रमण का अनुभव करेंगे और इसलिए, इसके खिलाफ एक प्राकृतिक प्रतिरक्षा विकसित कर लेंगे. टीकाकरण के बाद, मृत्यु और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी कम हो जाएगी.’
साधारण फ्लू बन जाएगा कोरोना
वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने समझाते हुए बताया, ‘मान लें कि हमारा शरीर एक नवजात बच्चे की तरह है. बच्चे शुरुआती सालों में अधिक संक्रमित होते है. क्योंकि उन्हें वातावरण से काफी अधिक पैथैगॉन मिलता है. लेकिन जैसे-जैसे वो धीरे-धीरे बड़ा होता है, उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और उसके बाद बच्चा बार-बार बीमार नहीं पड़ता. इसी तरह, जैसे-जैसे मानव शरीर कोरोना वायरस के अलग-अलग वेरिेंट का सामना करेगा लोगों की इम्यूनिटी बढ़ जाएगी. इसके बाद एक समय ऐसा आएगा कि कोरोना एक साधारण फ्लू की तरह रह जाएगा.’
ऐसे लोगों पर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना टीकाकरण वाले, बुजुर्ग और जो पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं उनके लिए कोरोना का खतरा बरकरार रहेगा. आईए एक नज़र डालते हैं कि कोरोना की लड़ाई में अब पिछले दो सालों में हमने क्या कुछ देखा है
2020 में क्या रही अच्छी चीज
कोरोना के पहले साल यानी 2020 में मेडिकल की दुनिया में इस वायरस से लड़ने के लिए हिट एंड ट्रायल मेथड अपनाए गए. साल 2021 में डॉक्टरों को पता चला कि आखिर कैसे इसका इलाजा किया जाए. इसके लिए एक प्रोटोकॉल तैयार किया गया. अब 2022 तक, कोविड -19 का इलाज अधिक व्यवस्थित होने की संभावना है.


इस तरह हुए शुरुआती इलाज
2020 की शुरुआत में कोरोना का इलाज मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ), एचआईवी की दवा रटनवीर और प्लाज्मा थेरेपी के जरिए किया गया. 2020 के मध्य तक, भारतीय दवा निर्माताओं ने प्रायोगिक दवा रेमेडिसविर लॉन्च की, जिसके बाद जापानी फ्लू की दवा फेविपिरवीर आई.
इलाज के लिए प्रोटोकॉल
दिल्ली के क्रिटिकल केयर मेडिसिन, होली फैमिली हॉस्पिटल के डॉक्टर सुमित रे ने बताया, ‘शुरुआत में हमने डिहाइड्रेशन और ब्लड थिनर मेडिसिन पर काम किया. बाद में, हमने गंभीर मामलों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल करना सीखा. इसके बाद इस बात पर काम किया गया कि मरीज को कब वेंटिलेटर पर रखा जाना चाहिए.’

आने वाले साल में क्या होगा
अगले साल हमें और बेहतर टीके मिल सकते हैं. इसके अलावा बूस्टर और एंटी-कोविड दवाइयां उपयोग में लाई जा सकती है. भारत बायोटेक की नानेजल वैक्सीन, बायोलॉजिकल ई का कॉर्बेवैक्स और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का कोवोवैक्स कुछ महीनों में बाजार में आ जाएगा. Corbevax और Covovax ने क्लीनिकल ट्रायल में लगभग 90% की प्रभावकारिता दिखाई है जो मौजूदा टीकों की प्रभावकारिता से अधिक है.




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