बांका का मंदार पर्वत इतिहास का साक्षी रहा है। हर साल के अंत, विशेषकर दिसंबर माह में इस क्षेत्र की महत्ता और भी बढ़ जाती है। मंदार पर्वत की तराई में न केवल बांका, बल्कि बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश से भी लोग पूरे परिवार के साथ यहां पिकनिक मनाने आते हैं।
बीते 2 सालों से कोरोना की वजह से नए साल का जश्न फीका रहा था। 2021 में फिलहाल मंदार की तलहटी में कई परिवार पिकनिक का लुफ्त उठा रहे हैं। पूरी तलहटी तरह-तरह के पकवानों से महकती रहती है। कहीं कोई परिवार पूरी-सब्जी और खीर का आनंद ले रहा है तो दूसरी तरफ लोग मांसाहारी व्यंजन का लुफ्त उठाते हैं।



राज्य के साथ ही बाहर से भी पिकनिक मनाने आ रहे लोग।
इस क्रम में पिकनिक मनाने आए लोगों ने कुछ सुझाव भी दिए। तलहटी में बनाए गए लक्ष्मी नारायण मंदिर के सरोवर के गंदे जल को लेकर पर्यटकों में मायूसी देखने को मिली। सरोवर के बीचों-बीच भगवान विष्णु ओर माता लक्ष्मी का मंदिर है। साथ ही दूर-दराज से आए लोगों को भी शाम तक मजबूरन यहां से निकलना पड़ता है। वजह कि इस क्षेत्र में रात्रि विश्राम की कोई सुविधा नहीं है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर।

कुछ ही महीने पहले मंदार पर्वत पर जाने के लिए रोपवे का भी प्रबंध हुआ था। लेकिन रोपवे स्टाफ को 2 महीने से वेतन नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि सरकार के द्वारा हमारी कंपनी को पूरा फंड अब तक नहीं दिया गया। इस वजह से हम सभी इंजीनियर को वेतन नहीं मिल पा रहा है।

इलाके में पिकनिक मनाने और रोपवे का लुत्फ उठाने आ रहे हैं लोग।



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