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पटना की हवा में कोरोना जैसा खत’रा, ऑक्सीजन लेबल डाउन, कोविड निगेटिव होने के बाद भी घुट रहा दम

हवा में घुलता जहर कोरोना की तरह असर दिखा रहा है। मरीज कोरोना की तरह लक्षण लेकर हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं। कोरोना संक्रमण की तरह ऑक्सीजन लेबल तेजी से डाउन हो रहा है, लेकिन जांच रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। पोस्ट कोविड और स्मोकिंग करने वालों के साथ अस्थमा के मरीजों में यह स्थिति अधिक देखने को मिल रही है। दीपावली के बाद से ऑक्सीजन में प्रदूषण के साथ चेस्ट संक्रमण बढ़ा है।

बिहार राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों की बात करें तो पटना में हवा काफी जहरीली होती जा रही है। पटना के ऑक्सीजन में प्रदूषण का स्तर 310 पहुंच गया है। यह स्थित रेड जोन होती है और इस तरह के ऑक्सीजन में अधिक समय तक रहने वालों में सांस लेने में तकलीफ के साथ फेफड़े में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

पटना में प्रदूषण का स्तर मुरादपुर में 263, राजवंशी नगर में 273, समनपुरा में 292 और राजकीय हाई स्कूल शिकारपुर में 204 हो गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अलर्ट किया है कि इस तरह की हवा में अधिक समय तक रहने वालों में सांस की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह कोरोना की तरह घातक है। कोरोना का असर भी फेफड़े पर होता है और ऑक्सीजन में भी प्रदूषण का असर फेफड़े पर हो रहा है।

पटना में अचानक से बढ़ गया चेस्ट

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चेस्ट रोग विभाग के डॉ मनीष शंकर का कहना है कि 10 दिनों में अचानक से चौंकाने वाले मामले आने लगे हैं। हर दिन OPD में 20 से 25 नए मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनमें कोरोना की तरह फेफड़े में परेशानी है। सांस लेने में तकलीफ के साथ चेस्ट इंफेक्शन का मामला अधिक मिल रहा है। नए मरीजों में कारण हवा में प्रदूषण का लेबल अधिक होना भी हो सकता है। ऐसे मरीजों पर ऑक्सीजन में प्रदूषण का असर काफी अधिक देखने को मिल रहा है, जो पूर्व में कोविड संक्रमित हुए या फिर स्मोकिंग करते हैं या फिर अस्थमा के मरीज हैं।

प्रतिदिन OPD में 5 ऐसे भी मरीज आ रहे हैं, जिसमें कोरोना संक्रमण की तरह तेजी से सांस फूल रही है। ऐसे मरीजों की कोविड जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी ऑक्सीजन लेबल काफी डाउन हो रहा है। ऐसे मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है।

सावधान हो जाएं कोरोना की तरह घातक है

चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ मनीष शंकर का कहना है कि हवा में प्रदूषण का जहर कोरोना की तरह ही फेफड़े के लिए खतरनाक है। ऐसे में सावधानी से ही इस संक्रमण से बचा जा सकता है। डॉ मनीष का कहना है कि कोरोना के संभावित लहर को लेकर लोगों में डर है और इस बीच हवा में जहर से दोहरा खतरा है। इस दोहरे खतरे में खान पान के साथ शुद्ध हवा को लेकर काफी गंभीर होना होगा। अगर चेस्ट ऐसी हवा से कमजोर हो जाएगा तो आने वाले दिनों में कोरोना की संभावित लहर आई तो संक्रमण और असर कर जाएगा। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को लेकर उपाय करना होगा।

ऐसे बच सकती है प्रदूषण वाली हवा से जान

  • कम से कम 20 मिनट तक मार्निंग वॉक नियमित रुप से करना होगा।
  • प्राणायाम और योगा पर विशेष ध्यान देना होगा।
  • फेफड़े को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करनी होगी।
  • फास्ट फूड का सेवन बंद करना होगा।
  • पौस्टिक आहार में साथ फल व हरी सब्जियों का सेवन करना होगा।

OPD में बढ़ रहे सांस के रोगी

पटना मेडिकल कॉलेज और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ नालंदा मेडिकल कॉलेज के साथ अन्य अस्पतालों की OPD में आने वाले मरीजों में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है। ऐसे मरीजों की कोविड की भी जांच करानी पड़ रही है, लेकिन 99 प्रतिशत रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। ओपीडी में बढ़ रहे मामले को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से अलर्ट रहना होगा नहीं तो आने वाले दिन में कोरोना से लड़ाई के पहले ही फेफड़ा कमजोर पड़ जाएगा। यह स्थिति काफी भयावह हो सकती है।

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