देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शुमार झारखंड और बिहार के बच्चों व किशोरों का सामाजिक व्यवहार सबसे ख’राब होता है। दोनों राज्यों की प्रति एक लाख आबादी पर करीब एक हजार बच्चों व किशोरों में आचरण संबंधी विकार पाया गया है।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की ओर से हाल ही में किए गए अध्ययन के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि आचरण संबंधी विकार में प्राय: बच्चे एवं किशोर आक्रामक व्यवहार करते हैं। इसमें ल’ड़ना, दूसरों को शारीरिक क्ष’ति पहुंचाना, ध’मकाना, पशुओं के साथ क्रू’र व्यवहार करना, ह’थियारों का इस्तेमाल करना और दूसरों को यौ’न क्रिया में शामिल कराने जैसे व्यवहार शामिल होते हैं।

इंडिया स्टेट लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव के लिए अध्ययनकर्ताओं ने राज्यवार आंकड़े बटोरे थे।इन आंकड़ों से पता चला कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति लाख आबादी पर 797 बच्चे व किशोर इस तरह का व्यवहार करते हैं। यह विकास दक्षिण भारतीय राज्यों में कम है और उत्तर भारत के राज्यों में अधिक है। उत्तर भारत में भी झारखंड में यह सर्वाधिक है, जहां प्रति लाख पर 983 बच्चों में यह व्यवहार पाया जाता है। झारखंड के बाद सबसे अधिक मा’मले बिहार में हैं जहां प्रति एक लाख में 974 बच्चों में ऐसा व्यवहार पाया गया है। वहीं, दक्षिण भारतीय राज्यों में केरल में आ’चरण संबंधी विकार के मा’मले सबसे कम हैं, जहां प्रति एक लाख पर 588 बच्चों में ऐसा विकार पाया जाता है। 626 की संख्या के साथ तमिलनाडु में भी स्थि’ति काफी बेहतर है।

क्यों होता है आचरण विकार?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आचरण संबंधी विकार के दो प्रमुख कारण होते हैं।
1. आनुवांशिक कारणः माता-पिता या दोनों में किसी एक परिवार के किसी व्यक्ति में आचरण संबंधी विकार होने पर बच्चे में यह मानसिक विकार आनुवांशिक तौर पर आ जाता है।
2. मनोसामाजिक कारणः परिवार और आसपास के परिवेश के अरा’जक होने, परिवार के सदस्यों के झ’गड़ालू होने या बेहद गरीबी के चलते भी बच्चों में यह विकार आ जाता है।
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