शनिवार भगवान शनिदेव का दिन माना जाता हैं। इस दिन शनिदेव की पूजा का विधान हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता हैं। शनिदेव का नाम आते ही अक्सर मन किसी अनिष्ट की आशंका से घब’राने लगता है। शनि को यम, काल, दु’:ख, दा’रिद्रय तथा मंद कहा जाता है। किसी भी परे’शानी, सं’कट, दुर्घ’टना, आर्थिक नु’कसान के होने पर यह मान लेते है कि शनि की अशुभ छाया पड़ी है। बहुत से लोग उनसे ड’रते हैं मगर वह ऐसे देवता हैं जो सभी के कर्मों का फल देते हैं। उनसे कोई भी बु’रा काम नहीं छुपा है। इन्हें खुश करने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते है।

क्योंकि अगर इनकी वक्र दृष्टि किसी पर पड़ गई तो उसका विना’श हो जाता हैं। दि व्यक्ति शनिवार को भगवान शनि की पूजा मन और सही तरीके से की जाए तो शनिदेव की असीम कृपा मिलती है और ग्रहों की दशा भी सुधरती है। आइये जानते हैं शनिवार को शनि देव की पूजा कैसे की जाती है जिससे आपको फल प्राप्त हो….शनिवार के दिन शुद्ध स्नान करके पुरुष पूजा कर सकते हैं।
-महिला शनि चबूतरे पर नहीं जाएं। मंदिर हो तो स्पर्श न करें।
-अगर आपकी राशि में शनि आ रहा है तो शनि को अवश्य पूजें।

-अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो शनिदेव का पूजन करें।
-यदि आपकी राशि का अढैया चल रहा हो तो भी शनि देव की आराधना करें।यदि आप शनि दृष्टि से त्र’स्त एवं पी’ड़ित हो तो शनिदेव की अर्चना करें।
-यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पेट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो तो आपको शनिदेव मनाना चाहिए।
-यदि आप कोई भी अच्छा कार्य करते हो तो शनि देव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।
-यदि आपका पेशा वाणिज्य, कारोबार है और उसमें क्ष’ति, घा’टा, परेशा’नियां आ रही हों तो शनि की पूजा करें।
-अगर आप असाध्य रो’ग कैं’सर, ए’ड्स, कु’ष्ठरो’ग, किडनी, ल’कवा, साइटिका, हृदयरोग, मधुमेह, खाज-खुजली जैसे त्वचा रो’ग से त्र’स्त तथा पी’ड़ित हो तो आप श्री शनिदेव का पूजन-अभिषेक अवश्य कीजिए।
सिर से टोपी आदि निकालकर ही दर्शन करें।
-जिस भक्त के घर में प्रसूति सूतक या रजोदर्शन हो, वह दर्शन नहीं करता।




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