कोरोना का खतरा टला नहीं है, इसे लेकर गंभीर रहना होगा। यह वाक्य प्रशासन के हर आदेश में शामिल रहा है। कोरोना को लेकर हर स्तर पर गंभीरता को लेकर प्रशासन दावा करता रहा, लेकिन पटना शहर के 96 और जिले के कुल 550 घाटों में कहीं भी कोई सख्ती नहीं दिखी है। भीड़ में कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराने वाले भी गुम हो गए। 15 दिनों से कोरोना की तैयारी में जुटे अफसरों को गाइडलाइन रटाया जा रहा था, लेकिन जब पालन कराने की बात आई तो सिस्टम फेल हो गया। दीघा से लेकर पटना सिटी तक कहीं भी कोई सख्ती नहीं दिखी है।
आदेश की औपचारिकता होती है पूरी
पटना में आदेश महज औपचारिकता पूरी कराने के लिए किया जाता है। 15 दिनों से चल रही छठ पूजा की तैयारी में हर दिन कोरोना को लेकर ही मंथन हो रहा था। अफसरों की मीटिंग में कोरोना के संभावित खतरे से निपटने को लेकर नए नए आदेश दिए जा रहे थे। घाटों पर सामाजिक दूरी के साथ मास्क को लेकर हर दिन आदेश दिया गया। बाजार से लेकर छठ घाट तक कहीं भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। पटना के प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार अग्रवाल के साथ पटना डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने हर बैठक में कोरोना को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को बड़ा टास्क दिया, लेकिन घाटों पर कहीं भी इसका कोई असर नहीं दिखा है।


दो गज की दूरी भी भूल गए।
पूजा के दौरान लापरवाही पड़ सकती है भारी
छठ पूजा के दौरान की गई लापरवाही भारी पड़ सकती है। कोरोना को लेकर मॉनिटरिंग के लिए अलग से बनाई गई टीम का कोई अता पता नहीं था। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी किसी को जागरूक करते हुए नहीं दिखाई पड़ी। सड़क पर बिना मास्क 50 रुपए का चालान काटने वाली पुलिस भी भीड़ में गायब दिखी। कोरोना को लेकर कहीं भी ऐसा नहीं दिखा जहां लोगों को मास्क या सोशल डिस्टेंस को लेकर टोका गया हो। हर जगह लापरवाही हुई है। भीड़ में संक्रमण का बड़ा खतरा है। इस खतरे की संभावना लोगों की लापरवाही से और बढ़ गई है।

घाट पर लगी श्रद्धालुओं की भीड़।
550 घाटों पर कहीं भी नहीं दिखी सख्ती
पटना जिले में कुल 550 घाटों पर छठ व्रतियों ने उपासना की है। पटना सदर में कुल 51 घाट बनाए गए थे। इसमें 30 नदी और 21 तालाब पर रहे। पटना सिटी में कुल 89 घाट बनाए गए थे। इसमें 85 नदी पर और 4 तालाब पर बनाए गए। दानापुर में 71 घाट बनाए गए थे। इसमें 38 नदी और 29 तालाब के साथ 4 नहर पर बनाए गए थे। बाढ़ में 231 घाट बनाए गए जिसमें 213 नदी और 18 तालाब पर बनाए गए थे। मसौढ़ी में 62 घाट बनाए गए जिसमें 28 नदी पर और 34 तालाब पर बनाए गए।

बिना मास्क के ही दिखे लोग।
पालीगंज में 46 घाट बनाए गए थे। इसमें 23 नदी और 4 तालाब के साथ 19 नहर पर बनाए गए थे। पटना जिले में कुल 417 नदी में और 110 तालाब में और 23 नहर के पास घाट बनाए गए थे, लेकिन कहीं भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन होते नही देखा गया। पटना में 96 घाटों पर तो कहीं भी ऐसा नहीं दिखा जहां अफसर सख्त दिखे हों और आम जनता कोरोना को लेकर जागरूक रही हो। ऐसे में कोरोना के खतरे को लेकर इनकार नहीं किया जा सकता है। कोरोना का खतरा कभी भी बड़ी चुनौती बन सकता है।



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