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जानिए, नवादा के सूर्य नारायण मंदिर के बारे में, द्वापरयुग से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

नवादा के नारदीगंज प्रखंड के हंड़िया गांव में स्थित है प्राचीन सूर्य नारायण मंदिर। मंदिर का इतिहास द्वापरकालीन युग से जुड़ा है। यहां पर छठ पर्व मनाने का अपना अलग ही महत्व है। यहां ग्रामीणों के अलावा राज्य के अन्य जिलों से भी लोग छठ व्रत करने पहुंचते हैं। हंडिया सूर्य नारायण मंदिर के पुजारी बीरू पांडेय ने बताया कि यहां छठ पर विधिवत स्नान और भगवान भास्कर की पूजा से श्रद्धालुओं की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

द्वापरकाल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
मंदिर के पुजारी ब्राह्मण बीरू पांडेय ने बताया कि- “हंड़िया सूर्य नारायण मंदिर का इतिहास द्वापरकाल से जुड़ा है। मंदिर कब बनी इसके बारे में कोई बता नहीं सकता है। उन्होंने बताया कि धनिया पहाड़ी जाने के दौरान जरासंध के परिवार ने यहां पर आकर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने बताया कि मंदिर के पास पोखड़ निर्माण के दौरान प्राचीन मर्तियां भी मिली थी। जो अभी भी इस मंदिर में मौजूद है। उन्होंने कहा यहां के जल और मिट्टी खास है। यहां पर भगवान सूर्य पर जलार्पण कर प्रार्थना करते हैं। उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।”

मंदिर परिसर में जुटते हजारों श्रद्धालु
ग्रामीणों के अनुसार, छठ पूजा में सूर्य मंदिर परिसर में ही श्रद्धालु छठ का प्रसाद बनाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया जाता है। खरना पूजा के दिन से ही यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। मंदिर के सामने एक बड़ा तालाब है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में पांच रविवार स्नान कर मंदिर में भगवान सूर्य की पूजा करने लोगों की बीमारी दूर होती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पहले यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत थी। लेकिन कोरोनाकाल के बाद से यहां आने वाले छठव्रतियों की संख्या थोड़ी कम गई है। लोगों ने कहा- 2 साल तक यहां पर रौनक नहीं दिखी। लेकिन इस बार पूरी उम्मीद है कि छठ पूजा में फिर से मंदिर में रौनक दिखेगी।

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