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सीतामढ़ी : प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं, मेहनत के साथ लगन से किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है

सीतामढ़ी : प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं

दुनिया का हर शॉक पाला नहीं जाता ,कांच के खिलोनो को उछाला नहीं जाता , मेहनत करने से हो जाती है मुश्किलें आसान, क्योकि हर काम तकदीर पर टाला नहीं जाता।

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। कोई भी बाधा प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती हैं। जरूरत है प्रतिभाओं को मौका देने की। समपर्ण , मेहनत के साथ लगन से किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है

ऐसा ही कर दिखाया है सीतामढ़ी के कोर्ट बाजार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता व सीतामढ़ी के चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के सचिव राजेश कुमार सुंदरका की पत्नी प्रो ज्योति सुंदरका ने। जिसने अपने व्यवाहिक सफर के 12 वर्षो बाद अपने अंदर छिपे कला के वल आज ना सिर्फ अपने परिवार को सवार है। वल्कि आस पास की आर्थिक रूप कमजोर महिलाओ का जीवन सवारा है। उसने अपने घर में वाल गोपाल नाम की संस्था खोल रखी है। जिसमे मिटटी के बनें बर्तनो, दीप, माला. भगवान के पोशाक, लक्ष्मी -गणेश की मूर्ति, आसान, कलश और रंगोली के साथ साथ डिजाइनर मोमबत्ती समेत कई प्रकार के आकर्षण कलाकृति से सजा कर निर्माण कर रही है। जो एक आकर्षण का केंद्र बन गया है। वही दीपावली इस अवसर पर इन कलात्मक व साज सज्जा के साथ तैयार सामानो मांग बढ़ गयी है। खास कर महिला वर्ग में इस बाल गोपाल नामक इस संस्था से बनी सामानो की तबज्जो दे रही है।

इधर कला के धनी प्रो ज्योति सुंदरका बताती है की शुरू से ही कला के प्रति रुझान रहने के कारन शादी से पूर्व बजाप्ता इस हुनर का ज्ञान प्राप्त किया। पर शादी हो जाने के बाद और व्यवाहिक जीवन के उलझन के बीच अपने कला का दफ़न कर दी। पर कला टीस उन्हें सताती रही। वही शादी 10 वर्षो के बाद उअके पति और ससुर के सहयोग मिला और सोई कला फिर जगी।

प्रो ज्योति आगे बताती है पहली वार वर्ष 2006 में उसने अपने कला को प्रदर्शन करने का मौका नगर स्थित सत्यनायन मंदिर में आयोजित कला प्रतियोगिता में मिला। जहा लोगो में उनके कलाकृति को लोगो ने सराहा है और सम्मानित किया गया। इस सफलता से उसने नयी उड़ान भरी। और आज वह ज़िले के अलावे कई शहरों में इस वाल गोपाल संस्था निर्मित बस्तुओ मांग है। वे बताती है इस वार दीपावली के अवसर पर चाइनीज सामानो की त्याग के कारण लोगो और अधिक माँग बढ़ गयी है।

सफलता का श्रेय पति और ससुर को देती है

प्रो ज्योति अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और ससुर को देती है। कहती है कि पति की प्रेरणा से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। मां सरस्वती देवी के सहयोग को सफलता की मुख्य वजह बताती हैं। पारिवारिक उलझन घरेलू काम से फुर्सत के छण में इस काम पुरे लगन से कार्य करने लिए निरंतर प्रोत्साहित करने का कार्य पति और उसकी छोटी बेटी अर्पणा दे रही है।

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