बिहार के मुजफ्फरपुर में बहुचर्चित बालिका गृह कां’ड पर कोर्ट आज अपना फैसला सुना सकता है। बालिका गृह में बच्चियों के यौ’न शो’षण का आ’रोप है। दिल्ली के साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत को मा’मले में फैसला सुनाना है। इस मा’मले में सीबीआई 21 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कांड में अबतक किंगपिन बताया गया ब्रजेश ठाकुर समेत 20 आ’रोपित जे’ल में बंद हैं। सीबीआई की ओर से कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में इन आ’रोपितों पर बला’त्कार व बाल यौ’न शो’षण रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो ) की धारा 6 के तहत आ”रोप लगाए गए हैं। चा’र्जशीट में लगाए गए इ”ल्जाम के साबित होने की स्थिति में आ’रोपितों को कम से कम दस साल कै’द व अधिकतम उ’म्रकै’द की स’जा हो सकती है।

पूर्व में 14 नंवबर व 12 दिसंबर 2019 को फैसले की तारीख मु’कर्रर थी। अधिवक्ताओं की ह’ड़ताल व विशेष कारणों की वजह से सुन”वाई की तारीख को आगे बढ़ी थी। सीबीआई जां’च में पाया गया था कि बालिका गृह में पी”ड़िताओं के साथ ना केवल बालिका गृह में कर्मचारी गल”त काम कर रहे थे, बल्कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी उसमें शामिल रहे। बच्चियों का यौन शो”षण हुआ। हालांकि, आरो’पितों ने अदालत में सु’नवाई के दौ’रान अपने आप को बेक’सूर बताया था। साथ ही उन्होंने अदालत में मु’कदमे का सा’मना करने की मंशा जाहिर की थी। उसके बाद यह सुन”वाई शुरू हुई थी।

ब्रजेश ठाकुर है मुख्य आ’रोपी
इस मा’मले में बालिका गृह का संचालक ब्रजेश ठाकुर मुख्य आ’रोपी है। सीबीआई के मुताबिक, इस बालिका गृह में 34 लड़कियां 7 से 17 साल की उम्र के बीच की थी जिनके साथ महीनों से यौ’न शो’षण हो रहा था। इस मा’मले में अन्य आरो’पितों के साथ तत्कालीन जिला बाल संरक्षण अधिकारी को भी गिर’फ्तार किया गया था। ये सभी आ’रोपी न्यायिक हिरा’सत में दिल्ली के ति”हाड़ जे”ल में बंद हैं।
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