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BHAGALPUR: एक ही छत पर उगाए जा रहे 20 प्रकार के टमाटर, आप भी अपनाएं यह तकनीक, देखें…

आप टमाटर की कितनी वेरायटी के बारे में जानते हैं? यह सवाल पूछने पर अधिसंख्य लोग सोचने लगते हैं। कुछ लाल वाला तो कई दो प्रकार के बारे में बताते हैं। यह दोनों प्रकार के टमाटर उन्होंने सब्जी बाजार में ही देखा है। एक देसला यानी लोकल मार्केट वाला और एक हर मौसम में बाजार में मिलने वाला, जिसके बारे में दुकानदार रांची से आयातित कहते हैं।बहरहाल, टमाटर की बीस के करीब वेराइटी यहां भागलपुर में उपलब्ध है। यह कृषि कॉलेज में नहीं, बल्कि एक सेवानिवृत फौजी के छत पर है। तीन वर्ष पहले सेना के सूबेदार पद से रिटायर ज्ञानेश्वर प्रसाद मंडल ने नीलकंठ नगर स्थित घर आकर किसानी शुरू की। उन्होंने अपनी छत पर ही किचेन गार्डेन तैयार किया है।

इसमें देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में पैदा होने वाले अलग-अलग किस्म के टमाटर विशेष आकर्षण हैं। टमाटरों में लाल चेरी टमाटर, पीला चेरी टमाटर, कवर्ड टमाटर, इसराइल का खजूरी टमाटर, सिंगापुरी टमाटर खास है। कवर्ड टमाटर भी अनायास चौंकाता है। इसमें टमाटर के उपर एक पतली झिल्ली चढ़ी रहती है। जबकि लाल चेरी टमाटर तो देसला टमाटर का अविकसित साइज जैसा है, पर पीला चेरी टमाटर नजरों को भी लुभाता है। सूबेदार मंडल कहते हैं कि इसका स्वाद भी कुछ हटकर है। यह टमाटर के स्वाद का अहसास कराते हुए तरबूज जैसा आनंद देता है। कवर्ड टमाटर का टेस्ट तो सबसे अलग है। वे बताते हैं कि अन्य राज्यों और विदेश से लायी गई प्रजातियों में किसी में खट्टापन है तो किसी में मीठापन।


सूबेदार अपने किचेन गार्डेन में लगे अन्य सब्जियों, सलाद और मसाला के बारे में भी जानकारी देते हैं। वे अपनी छत पर वे गरम मसाला, दालचीनी, काजू, किसमिश, नेंबू, अमरुद, सलाद पत्ता, तेज पत्ता बैगन आदि भी लगाए हैं। वे बताते हैं कि टमाटर की इतनी वेराइटी को देखने और इसका स्वाद चखने लोग आते हैं। सबौर कृषि कॉलेज के विज्ञानी भी यहां आते हैं। वे आगंतुकों को कम जगह में भी किचेन गार्डेन विकसित करने की सलाह देते हैं। अभी उनके किचेन गार्डेन में खाने से अधिक टमाटर उपज जाता है तो आसपास के लोगों को दे देते हैं, क्योंकि बाजार में ले जाने भर उत्पादन अभी नहीं हो रहा है।

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