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गंगा को प्रदूषित करने वालों खि’लाफ होगा केस, गंगा में मूर्ति विसर्जन करने वालों की तलाश

गंगा में मूर्ति विसर्जन को लेकर की गई सख्ती के बाद भी गंगा को प्रदूषण से नहीं बचाया जा सका है। इसका बड़ा कारण घाटों पर तैनात किए गए मजिस्ट्रेट कागजी आदेश की तरह बैठे रह गए। मजिस्ट्रेट और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती इसलिए ही की गई थी कि गंगा में मूर्ति व पूजा सामग्रियों का विसर्जन नहीं होने पाए, लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी से सारी सख्ती फेल हो गई है। मजिस्ट्रेट की गलती के बाद अब गंगा में मूर्ति विसर्जन करने वालों की तलाश की जा रही है। ऐसे लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया गया है जो गंगा में मूर्ति विसर्जन किए हैं।

प्रशासन ने कहा जानबूझ कर की है गलती

गंगा को प्रदूषण से बचाने को लेकर मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर कृत्रिम तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में गंगा का पानी डाला गया था और इसी में मूर्तियों का विसर्जन करना था। इसके लिए हर घाट पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी। जिस तरह से नियम बनाकर सख्ती दिखाई गई उस हिसाब से घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण से गंगा को प्रदूषित होने से नहीं रोका जा सका। गलती मजिस्ट्रेट की है जो घाटों पर सख्ती नहीं दिखा पाए हैं। बताया जा रहा है कि कई घाटों पर तो मजिस्ट्रेट देखने तक नहीं गए कि किस तरह से विसर्जन हो रहा है और समस्या क्या आ रही है। अब प्रशासन का कहना है कि जानबूझकर मनमानी की गई है।

मजिस्ट्रेट की गलती पड़ेगी भारी

जिला प्रशासन का कहना है कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर दुर्गा पूजा का त्यौहार शांतिपूर्ण रुप से संपन्न हो गया है। प्रशासन का मानना है कि अधिकांश लोगों ने सरकारी आदेश और निर्धारित मानक का पालन करते हुए मूर्ति का विसर्जन कृत्रिम तालाब में किया है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा लोगों को सभी प्रकार के नियमों की जानकारी देने और शांति समिति की बैठक के बाद भी कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर मूर्ति विसर्जन में सरकारी आदेश एवं निर्धारित मानक का उल्लंघन किया गया है। पटना डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी को ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।

बड़ा सवाल अब कैसे होगी पहचान

डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी को आदेश जारी कर ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है जो गंगा में मूर्ति विसर्जन किए हैं। अब सवाल यह है कि जब घाटों पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी तो फिर गंगा में मूर्ति का विसर्जन कैसे हो गया है। अगर मजिस्ट्रेट की तैनाती के बाद भी गंगा में मूर्ति का विसर्जन हुआ है तो सबसे पहले मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अब अनुमंडल पदाधिकारियाें के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों की पहचान करना है जो गंगा में मूर्ति विसर्जित किए हैं। घाटों पर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था जिसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान कर ली जाए। घाटों पर मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गंगा में मूर्ति वसर्जित करने वालों की तलाश बड़ी चुनौती है।

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