हाजीपुर के पानापुरलंगा गांव में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां खासतौर पर विजयादशमी और बसंत पंचमी के दिन दूध की नदी बहती है। यह मंदिर भुइया बाबा मंदिर के नाम से मशहूर है। इस मंदिर में विभिन्न राज्यों समेत वैशाली जिले से सैकड़ों पशुपालक बाबा बसावन, बाबा बखतौर एवं माता गहिल की मूर्ति पर दुग्धाभिषेक करते हैं। इसके चलते मंदिर में दूध की नदी बहती नजर आती है।
विजयादशमी पर शुक्रवार सुबह से ही मंदिर में पशुपालकों की भीड़ लगी रही। वे सैकड़ों लीटर दूध चढ़ा चुके हैं। यह कार्यक्रम शाम तक चलेगा। वहीं, प्रसाद के रूप में यही दूध श्रद्धालुओं के बीच वितरित भी की जाती है। खासतौर पर यह मंदिर पशुपालकों के बीच काफी प्रसिद्ध है।

पशुपालक ढोल-झाल, मृदंग, करताल के साथ पहुंचते हैं मंदिर
पशुपालक यहां ढोल-मजीरा के साथ गाते बजाते दूध लेकर पहुंचते हैं। बाबा भुइया स्थान पर दूध चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूरा करने आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बाबा भुइया में पशुपालकों की ऐसी आस्था है कि दुग्धाभिषेक करने से पशुओं की सुरक्षा होती है और पशु किसानों को दूध देती है, जिससे जीवन चलता है। यह परंपरा लंबे समय से चलती आ रही है।
पशुपालकों की होती है मन्नतें पूरी
विजयादशमी और बसंत पंचमी को यहां मेला लगता है। मुजफ्फरपुर जिले से पहुंचे पशुपालक जगन्नाथ राय ने बताया- “मन की मुराद पूरी होती है। इसके चलते वह बाबा भुईया मंदिर में दुग्धाभिषेक करने आते हैं। सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। इस मंदिर में दूध चढ़ाने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि आती है। जिसके चलते लोग यहां दूध चढ़ाने आते हैं। श्रद्धालुओं के आने से पूरा माहौल भक्तिमय नजर आता है।’

प्रसाद के रूप में वितरण होता है दूध
अशोक कुमार पासवान और चंद शेखर पंडित के मुताबिक मंदिर में चढ़ावे के रूप में जो दूध होता है उसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। वहीं, दूध को कम कीमतों में बेच दिया जाता है। उस पैसे से मंदिर के निर्माण जनकल्याण हावड़ा सामाजिक सरोकार के लिए खर्च किया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दूध चढ़ाने से पशुओं को किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होती है। यहां जो भी पशुपालक मन्नत मांगते हैं, उनकी मन्नतें पूरी होती है। इसके कारण बिहार ही नहीं, बाहर से भी यहां पशुपालक पूजा-अर्चना और दूध अभिषेक को लेकर पहुंचते हैं।



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