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बोधगया से बोधिवृक्ष के पौधे मिलना अब मुश्किल, राज्य सरकार ने बोधिवृक्ष के पौधे बांटने पर लगाई रोक

बोधगया के जिस बोधिवृक्ष के नीचे 2610 साल पहले सिद्धार्थ ज्ञान प्राप्त कर बुद्ध बने, अब उसके पौधे लेने के नियम में बदलाव हो गया है। पहले सर्वसुलभ रहने वाले पवित्र बोधिवृक्ष के पौधे को लेने के लिए अब राज्य के गृह विभाग की अनुमति चाहिए। राज्य सरकार ने बोधगया मंदिर प्रबन्धकारिणी समिति के बोधिवृक्ष बांटने पर रोक लगा दी है।

बीटीएमसी के अनुसार, अब गृह विभाग की अनुमति के बाद ही पवित्र बोधिवृक्ष के शिशु पौधों को दिया जाता है। हालांकि बौद्धों की आस्था का प्रतीक व विश्व में प्रेम, अहिंसा, शांति व भ्रातृत्व का संदेश प्रसारित करने वाला बोधिवृक्ष विश्व के 12 से अधिक देशों में भगवान बुद्ध के संदेश को प्रसारित कर रहा है।

बौद्ध देशों में केंद्र सरकार द्वारा बोधिवृक्ष के पौधे उपहार में देकर करुणा, सहिष्णुता व अहिंसात्मक मूल्यों को संवर्धित करने का प्रयास किया जाता रहा है। बोधिवृक्ष का पौधा द्विपक्षीय संबंध बेहतर बनाने में उपयोग में लाया जाने लगा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। इससे न केवल दो देशों के बीच बेहतर संबंध हुए, बल्कि टूरिज्म सेक्टर को भी लाभ हुआ।

कई देशों में बोधिवृक्ष का पौधा भेंट कर केंद्र द्वारा बढ़ाया जा रहा द्विपक्षीय संबंध

  • 1913 अनागारिक धर्मपाल ने एक पौधा होनोलूलू में मैरी फोस्टर को भेंट की।
  • 1950 चेन्नई की थियोसोफिकल सोसाइटी में लगाया गया।
  • 1954 पंडित नेहरू ने चीन को भेंट की।
  • 1958 पं. नेहरू ने वियतनाम को दिया था।
  • 1989 केंद्र ने जापान के निहोन जी को दिया।
  • 2003 थाईलैंड को सौंपा।
  • 2010 पटना बुद्ध स्मृति पार्क।
  • 2012 में बांग्लादेश के ब्रह्मानंद बरूआ ने अमेरिका के थाउजेंड ओक्स में लगाया।
  • 2012 पटना में सीएम आवास में लगा।
  • 2013 थाईलैंड को भेंट की।
  • 2014 पीएम मोदी ने द. कोरिया को भेंट किया
  • 2014 पीएम मोदी ने नेपाल को दिया।
  • 2014 पीएम मोदी ने वियतनाम को सौंपा।
  • 2015 मोदी ने भूटान के पीएम को पौधा दिया।
  • 2021 राष्ट्रपति भवन में लगा।

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