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अब तेजप्रताप को बर्दाश्त नहीं करेंगे तेजस्वी

तेजप्रताप यादव राजद के अंदर अलग-थलग पड़ गए हैं। राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का बयान कि तेजप्रताप हैं कहां, वे तो खुद ही पार्टी से अलग-थलग हो गए हैं ? या राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बयान- हू इज तेजप्रताप? के बाद स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट है। तेज प्रताप ने अपनी अलग राह पकड़ ली है। वे कड़े शब्दों वाला बयान कि लालू प्रसाद को दिल्ली में बंधक बना कर रखा गया है देकर भी देख चुके हैं। इन सब का कोई असर न पार्टी पर दिख रहा है और न अब तेजस्वी यादव उस पर कुछ बोल रहे हैं। राजद पूरी तरह से तेजस्वी यादव के साथ है। हां एक बात यह जरूर है कि पार्टी के प्रवक्ता दोनों भाईयों के बीच के मनमुटाव पर कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं। सभी को यह लगता है कि पता नहीं कब दोनों एक हो जाएं, भाई ही तो हैं !

लालू प्रसाद को बंधक बनाने वाले बयान पर भी भड़के नहीं तेजस्वी

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव के बयान का उत्तर अपने हिसाब से देते हैं। जरा भी उग्र नहीं होते। लालू प्रसाद को बंधक बनाए रखने वाले तेजप्रताप के बयान पर भी तेजस्वी बौखलाए नहीं, आराम से जवाब दिया। जवाब में भी तेजप्रताप यादव पर किसी तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। यह साफ है कि तेजप्रताप के खास आकाश को तेजस्वी के इशारे के बाद ही छात्र राजद के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। तारापुर में छात्र जनशक्ति परिषद् के संजय यादव जब निर्दलीय खड़े हुए तो उसे भी तेजस्वी यादव ने नामांकन वापस लेने के लिए मना लिया।

लालू परिवार भी तेजस्वी यादव के साथ दिख रहा!

यानी तेजस्वी यादव बिना मुखर हुए सब कुछ कर रहे हैं। राजद की स्टार प्रचारक की सूची पर सवाल उठाने के बाद भी तेजस्वी ने मां राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती का नाम नहीं जोड़ा, या उस पर किसी तरह का बयान देकर बचाव नहीं किया। मतलब साफ है। लालू परिवार भी तेजस्वी यादव के साथ दिख रहा है। यह तेजस्वी और उनके रणनीतिकारों की सधी चाल है कि तेजप्रताप यादव को पार्टी के अंदर हाशिए पर लाने में सफल हुए। तेजप्रताप को न राजद के प्रशिक्षण शिविर में बुलावा गया और न राजद विधायकों की बैठक में। जबकि दोनों समय तेजप्रताप पटना में ही थे।

तेजप्रताप ने न इस्तीफा दिया न निष्कासित हुए पर पहले की तरह पार्टी में लौटना मुश्किल

राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव कुमार कहते हैं कि तेजप्रताप यादव जैसी सक्रियता अभी दिखा रहे हैं पहले दिखाते तो राजद को और मजबूती मिलती। लेकिन राजद के ज्यादातर या सभी लोग तेजस्वी यादव के साथ ही रहेंगे। सधे हुए खिलाड़ी धोनी की तरह तेजस्वी काम कर रहे हैं। भले ही तेजप्रताप ने इस्तीफा नहीं दिया या निष्कासित नहीं किया गया पर पहले की तरह तेजप्रताप यादव की वापसी राजद में मुश्किल है।

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