
भाषा के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ऐसा देखा गया है कि मिशनरी द्वारा चलाए जाने वाले स्कूलों में अच्छे परिवार के बच्चे पढ़ाई के मा’मले में तो बेहतर करते हैं, उनका करियर सफल होता है लेकिन जब वे विदेश जाते हैं तो गोमां’स खाने लगते हैं। ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने उन्हें संस्कार नहीं दिए।’उन्होंने कहा, ‘हम पर प्राय: क”ट्टरवादी होने के आरोप लगते हैं। हमारी संस्कृति की यही उ’दारता है। हम लोग चींटियों को मीठा खिलाते हैं और सांप को दूध पिलाते हैं। यह अलग बात है कि कभी-कभी यही सांप हमें ड’राते हैं।’ सिंह अपनी व्यंग्यात्मक शैली के लिए भी मशहूर हैं।केंद्रीय मंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में एक संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित किया और वि’वादित कानून के खि’लाफ प्र’दर्शन की तुलना पाकिस्तान प्रायोजित गजवा-ए-हिंद (भारत के खि’लाफ धर्म के नाम पर युद्ध) से की।उन्होंने कानून की आ’लोचना करने पर कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की कड़ी निंदा की। सिंह ने कहा कि हिम्मत है तो कांग्रेस बाहर आए और खुलकर दावा करे कि वह बांग्लादेश से सभी अ’वैध प्रवासियों और म्यामां से आए रो’हिंग्याओं को नागरिकता देने का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख सिर्फ वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है।

सिंह ने विपक्षी दलों की इस दलील का जिक्र किया कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का कानून धर्म के आधार पर लोगों से भे’दभाव है। केंद्रीय मंत्री ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ हाल में हुई ”दुर्व्य’वहार की घ’टना की निं’दा की। उल्लेखनीय है कि केरल के राज्यपाल जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सीएए के पक्ष में बोल रहे थे तब वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब ने उनके साथ कथित ध’क्कामु’क्की की थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘ये तमाम चीजें पाकिस्तान के गजवा-ए-हिंद का हिस्सा हैं जिनका मकसद भारत को क’मजोर करना है। सीएए सिर्फ एक बहाना है। यह तो ‘कहीं पे निगाहें, कहीं पे नि’शाने का उदाहरण है।’




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