लालू प्रसाद की पार्टी राजद में दो भाइयों की कहानी दिलचस्प मोड़ पर है। पहले तो छोटे भाई तेजस्वी ने तेज प्रताप को अनुशासन और बड़ों के सम्मान की सीख दी, क्योंकि बड़े भाई ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कह दिया था। इसके बाद तेजप्रताप यादव ने गीता की जगह राष्ट्रकवि दिनकर की ओजस्वी रचना रश्मिरथी को उठा लिया था।
साथ ही कहा था-‘दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पांच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वही खुशी से खाएंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे!’ अब तेज प्रताप यादव ने कहा है कि – ‘ हे अर्जुन! मन अशांत है और इसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।’

अशांत मन को शांत करने का टिप्स
तेज प्रताप यादव ने ट्वीट किया है। तेज ने कृष्ण द्वारा अर्जुन को समझाते हुए फोटो भी पोस्ट किया है। इसे तेजस्वी को छोटे भाई को दी गई सलाह के तौर देखा जा रहा है। बता दें कि तेजप्रताप अपने छोटे भाई को अर्जुन कहते रहे हैं। खुद को उनका सारथी कृष्ण। लालू प्रसाद के हस्तक्षेप के बाद राजद की राजनीति के कृष्ण और अर्जुन के बीच शीत युद्ध अभी शांत हैं, लेकिन अशांत मन को शांत करने के टिप्स कृष्ण ने अर्जुन को दिए हैं।


एक दिन पहले तेज प्रताप ने यह पोस्ट शेयर की थी। सियासी गलियारे में इसके भी मतलब निकाले गए थे।
कुरुक्षेत्र में कृष्ण ने अर्जुन को कर्म का पाठ पठाया
एक दिन पहले तेज प्रताप ने वह फोटो शेयर किया था, जिसमें कृष्ण अपना भव्य रूप कुरुक्षेत्र में दिखा रहे हैं और अर्जुन घुटने मोड़कर हाथ जोड़ रहे हैं। तेज ने यह फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था- ‘फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है। ‘

रिश्ता खून का है, लेकिन राजनीति है..
रश्मिरथी के बाद अब गीता की उक्तियां ‘कृष्ण’ अपने ‘अर्जुन’ को लगातार सुना रहे हैं। शायद कृष्ण को मालूम है अंदर ही अंदर अर्जुन (तेजस्वी यादव) के अंदर कितनी उथल-पुथल है। रिश्ता खून का है, लेकिन राजनीति है। तेज प्रताप की पोस्ट इस बात का संकेत देती है कि अभी बवंडर थमा नहीं है।




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