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IGIMS में बड़ी घ’टना / 10 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री ने किया था उद्घाटन, उसकी दीवार फॉल सीलिंग गिरने से मजदूर घा’यल

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में कैंसर विभाग की ओपीडी में शुक्रवार को बड़ी घटना हुई है। यहां कई दीवाल और फॉल सीलिंग के साथ छत का हिस्सा गिरने से एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस घटना में काम कर रहे कुछ अन्य मजदूरों को भी चोट आई है। घटना उसी नविर्मित भवन में हुई है जिसका शुभारंभ 10 अगस्त को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने किया था। घटना के पीछे भवन के निर्माण में हुई मनमानी को जिम्मेदार बताया जा रहा है और इसी कारण से भवन हैंडओवर नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है।

भवन में पहले से ही हैं खामियां

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में कैंसर का 3 मंजिला भवन बनाया गया था। इस भवन के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी विभाग हैंडओवर नहीं ले रहा था। सूत्रों का कहना है कि भवन को इस लिए जिम्मेदार हैंडओवर नहीं ले रहे थे क्योंकि इसमें कई खामियां हैं। एक साल से भवन बनकर तैयार था। ओपीडी को लेकर जब दबाव बना तो आनन फानने में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने 10 अगस्त को वर्चुअल उद्घटन कर दिया।

शुक्रवार को हुई घटना, मचा हड़कंप

शुक्रवार को काम के दौरान कैंसर विभाग के भवन की तीन दीवाल गिर गई। दीवाल के साथ फॉल सीलिंग और छत का कुछ हिस्सा गिर गया। इस घटना में काफी मलबा गिरा और उससे मजदूर घायल हो गए। बताया जा रहा है कि मजदूर को भर्ती कराया गया है। दीवार कैसे गिरी यह नहीं पता चल पा रहा है। घटना को लेकर तरह तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। IGIMS प्रशासन का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर बनाया जा रहा था इस दौरान घटना हुई है लेकिन इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि जब एजेंसी को पूरा काम करके भवन को देना था तो ऑपरेशन थिएटर कैसे छूट गया। कई ऐसे सवाल हैं जो सिस्टम का खुलासा कर रहे हैं।

हैंडओवर नहीं लेने के बीछे खेल तो नहीं

IGIMS की केंसर की बिल्डिंग को हैंडओवर नहीं लेने के पीछे भी कई तरह के सवाल हैं। बताया जा रहा है कि नए भवन में भी पानी लग रहा था और कई जगह खामियां थी। इस कारण से हैंडओवर नहीं लिया जा रहा था। सूत्रों का कहना है कि कैंसर विभाग की बिल्डिंग की ओपीडी का उद्घाटन भी आनन फानन में किया गया था। इस कारण से इंजीनियरिंग विभाग ने हैंडओवर लिया था। जब निर्माण एजेंसी से भवन लिया गया तो इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। अगर ऑपरेशन थिएटर नहीं था तो उसे क्यों नहीं बनवाया गया। ऐसे कई सवाल हैं जो घटना के बीच चर्चा में हैं। एजेंसी से समझौता हुआ था कि बिल्डिंग मशीन से लेकर सब अपउेट करके ही भवन को हैंडओवर करना है। बताया जा रहा है कि प्रापर सेंटर काम करने लगे इसलिए ही काम चल रहा था और इसमें घटना हुई है।

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