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मुजफ्फरपुर : मां और पत्नी से पहले एक स्वास्थ्यकर्मी का रीना ने निभाया फर्ज

मां और पत्नी से पहले एक स्वास्थ्यकर्मी का रीना ने निभाया फर्ज

  • 50 हजार से ज्यादा का करा चुकी हैं टीकाकरण 
  • शहर के एक मात्र 9 टू 9 टीकाकरण केद्र में हैं रीना सिन्हा

मुजफ्फरपुर, 24 अगस्त।
एएनएम रीना सिन्हा सदर अस्पताल स्थित 9 टू 9 कोविड टीकाकरण केंद्र में टीका लगा रही हैं। टीका लगाने की सजगता और तत्परता के बीच उनके चेहरे पर आज हल्की सी मुस्कान है। वह प्रत्येक टीके पर खुश हो रही हैं। रीना सिन्हा की  इस मुस्कान का मकसद साफ है, लोगों का टीकाकृत होना ताकि वह सुरक्षित रहें। रीना सिन्हा का पेशे से भले ही एक स्वास्थ्यकर्मी का हो, टीका देना उनका काम हो पर इस बीच उन्होंने जो संदेश दिया वह एक मां और पत्नी के लिए कर पाना मुश्किल था। यही खास बात उनके संघर्ष की कहानी को औरों से अलग भी करती  और विशेष भी बनाती है। 


8 महीने से लगातार काम 
रीना सिन्हा कहती हैं कि जिस दिन से टीकाकरण अभियान शुरू  हुआ है उस दिन से आज तक मैंने छुट्टी नहीं ली। मोतिपुर के एक एपीएचसी में मेरी  पोस्टिंग थी। वहां से मुझे टीकाकरण के लिए सदर में बुलाया गयाा। अभी फ्रंट लाइन वर्कर के लिए टीकाकरण चल ही रहा था कि कोविड की दूसरी लहर आ गयी। इस लहर में मेरा एक बेटा और पति दोनों ही संक्रमित हो गए। दोनों की स्थिति गंभीर होती जा रही थी। एक तरफ मुझे मां और पत्नी का फर्ज बुला रहा था वहीं दूसरी तरफ एक समर्पित स्वास्थ्यकर्मी जिसने यह पेशा सेवा भाव के लिए चुना हो। जिसमें मां और पत्नी का रिश्ता हार गया। परिवार वालों से लेकर पहचानने वालों तक ने मुझे बहुत ताने दिए, पर मेरा हौसला टीकाकरण करने के लिए बुलंद था। कोविड के समय में मेरा दिया हुआ टीका न जाने कितने ही जानों को बचा सकती थी। एहतियाात और ईश्वर के आशीर्वाद  का नतीजा था कि बेटा और पति भी रिकवर कर गए और मैं भी कभी संक्रमित नहीं हुई। 
50 हजार से ऊपर का कराया टीकाकरण 
रीना कहती हैं कि अपने 8 महीने के दौरान मेरे सेन्टर पर 50 हजार से ऊपर लोगों को टीका लगा है। किसी भी दिन मेरी टीम की रिर्पोटिंग 1400 से कम नहीं जाती थी। अगर टीकाकरण नहीं होता तो मैं अपनी ड्यूटी पर होती थी। 15 अगस्त के मौके पर बेहतर स्वास्थ्यकर्मी में मैं भी नोमिनेट हुई थी। टीका लगाने आने वाले लोगों को अपने आस-पड़ोस के लोगों  को टीका के लिए प्रेरित करने के लिए कहती हूं ताकि प्रत्येक व्यक्ति टीकाकृत हो जाए। लोगों के भ्रम का निष्पादन करती हूं। कहती हूं कि टीके का कोई एडवर्स रिएक्शन नहीं है। मैंने खुद न जाने कितने गंभीर रोगों के मरीजों को भी टीके दिए हैं।

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