प्रारंभिक शिक्षा के निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया है। वे अब पंचायती राज विभाग में निदेशक का पद संभालेंगे। शिक्षक नियोजन प्रक्रिया के बीच उनके इस ट्रांसफर से अभ्यर्थी भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर मुहिम चलाकर वे उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं। ट्विटर पर ये मुहिम टॉप 10 में ट्रेंड कर रही है। इसको लेकर ट्वीटर पर #we_want_Ranjitkr_IAS_come_back अभियान चल रहा है। इस हैश टैग में शिक्षा मंत्री विजय चौधरी को भी टैग किया जा रहा है।


ट्विटर पर ट्रेंडिंग।
इसलिए हो रही है वापसी की मांग
अभी बिहार में छठे चरण की शिक्षक नियोजन प्रक्रिया चल रही है। इसमें पहले भी व्यापक पैमाने पर धांधली हुई है, जिसकी जांच निगरानी में चल रही है। वहां भी कई फर्जी डिग्रीधारी शिक्षकों के जेल जाने की नौबत है। शिक्षक नियोजन की चल रही नई नियोजन प्रक्रिया में भी रणजीत कुमार सिंह ने बहुत हद तक फर्जी डिग्रीधारियों पर नकेल कसी थी। इस बहाली में फर्जीवाड़ा करने वाली नियोजन इकाईयां भी रडार पर थे, इसलिए वे कई अफसरों सहित कर्मियों की आंख की किरकिरी बन गए थे। उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कई नियोजन रद्द तक कर दिए गए।
उन्होंने शिक्षा माफियाओं की नींद उन्होंने उड़ा दी थी और इसलिए माफिया इस कोशिश में लगे हुए थे कि उन्हें शिक्षा विभाग से हटाया जाए। पहली बार नियोजन पर लाइव नजर रखी जा रही थी। शिक्षक नियोजन इतनी चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था पहले कभी नहीं चली। नतीजा कई जगहों पर बिना लिस्ट चिपकाए बहाली होने, पैसे लेकर बहाल कर देने, मैरिट लिस्ट में हेराफेरी करने, आरक्षण के नियम की धज्जियां उड़ाने जैसे आरोप पहली की नियुक्तियों पर लगते रहे हैं। इन सब गड़बड़ियों पर इस बार लगाम लगाने की बड़ी कोशिश थी। पूरी प्लानिंग के साथ इस पर नजर रखा जा रही थी।
सोशल मीडिया की शिकायत पर भी संज्ञान लेते थे
रणजीत कुमार सिंह की खूबी यह थी कि वे किसी भी अन्य अफसर से ज्यादा एक्टिव होकर शिक्षक नियोजन प्रक्रिया को पूरी कराने में लगे हुए थे। किसी अभ्यर्थी को किसी तरह की परेशानी होती तो वह सोशल मीडिया पर उनसे सीधे शिकायत करता था। फोन पर मैसेज तक अभयर्थी करते थे। इस नियुक्ति को लेकर कई बार वे फेसबुक लाइव भी हुए और नियोजन से जुड़ी समस्याओं का समाधान दिया।
ईमानदार को सजा क्यों बिहार सरकार
बड़ी संख्या में शिक्षक नियोजन से जुड़े अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें वापस करने की मांग सरकार से की है। कुछ ने तो इसे सरकार का तानाशाही रवैया तक कहा है। बीके मिश्रा ने लिखा है कि हमलोग उनके बिना अकेले पड़ गए हैं। शिशिर कुमार ने सवाल किया है कि ईमानदार आईएएस को सजा क्यों बिहार सरकार ? दीपक कुमार ने लिखा है- पहली बार कुछ अच्छा होने वाला था…। उनको वापस करने की मुहिम ट्विटर और फेसबुक पर अभ्यर्थियों और अन्य युवाओं ने छेड़ रखी है।



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