सावन का आज पहला सोमवार है, लेकिन कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से बाबा बैद्यनाथ धाम में सन्नाटा पसरा है। सोमवार को कुछ श्रद्धालु पूजा के लिए आए, पर उन्हें मंदिर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं मिली। इधर, श्रद्धालुओं को मंदिर में आने से रोकने के लिए पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। भक्तों के लिए जिला प्रशासन ने मंदिर से लाइव दर्शन की व्यवस्था की है।
यहां विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला लगता है। मेला का आयोजन बिहार और झारखंड में संयुक्त रूप से होता है। बिहार के भागलपुर जिले के सुलतानगंज से गंगा जल लेकर श्रद्धालु पैदल कांवड़ यात्रा करते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचते हैं। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करते हैं। सुलतानगंज से देवघर की दूरी करीब 108 किलोमीटर है। इस 108 किमी की पट्टी में श्रावणी मेला लगता है, लेकिन कोरोना के कारण श्रावणी मेला-2021 का आयोजन नहीं हो रहा है। पिछले साल भी कोरोना के कारण मेला नहीं लगा था। श्रावणी मेला नहीं लगने और बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलने से भक्त निराश हैं।
ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था
बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री के अनुसार, सरकार की वेबसाइट झारगोवडॉटइन, देवघर उपायुक्त, पीआरडी देवघर के फेसबुक पेज और जिला प्रशासन की वेबसाइट https://deoghar.nic.in/ पर ऑनलाइन बाबा का दर्शन कर सकते हैं। बाबा बैद्यनाथ की पूजा सुबह 4.45 से 5.30 बजे तक लाइव दिखाया जाएगा। शाम को होने वाली शृंगार पूजा को 7.30 से 8.15 बजे तक सभी प्लेटफाॅर्म पर प्रसारित किया जाएगा।


श्रद्धालुओं को मंदिर में आने से रोकने के लिए पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।
बिहार-झारखंड बॉर्डर पर पुलिस जवान तैनात
लगातार दूसरे वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का आयोजन नहीं हो रहा है। फिर भी बाबा भोले के भक्त बाबा का दर्शन करने को तैयार है, कुछ लोग आ ही रहे हैं। उन्हें रोकने के लिए प्रशासन ने कई स्तर पर इंतजाम किया है। कांवरिया पथ स्थित झारखंड के प्रवेश द्वार दुम्मा में खासतौर पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया है। वहां दंडाधिकारी व पुलिस बल 24 घंटे पूरी तरह से मुस्तैद हैं। साथ ही दर्दमारा, रिखिया, बुढ़वाकुरा, खिजुरिया, कोठिया, चौपामोड़, ठाढ़ी मोड़ पर भी पुलिस कर्मी कांवरियों के वाहनों को देवघर शहर के अंदर प्रवेश करने से रोका जा रहा है। सोमवार को भी यहां पुलिस का सख्त पहरा नजर आया। दुम्मा में कांवरियों को रोकने के लिए लोहे का बैरिकेट व बांस का बेरियर लगा दिया गया है।

सोमवारी पर सिर्फ सरकारी पूजा, भक्तों में निराशा
सावन महीने में सोमवार का खास महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पूजा करने से भोले बाबा की कृपा होती है, लेकिन कोरोना के कारण सोमवारी पर भक्तों को पूजा करने की इजाजत नहीं है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सिर्फ सरकारी पूजा हो रही है। सरकारी पूजा सुबह और शाम होती है। पहली सोमवार को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन व पुलिस कर्मी पूरी तरह से मुस्तैद हैं। उन्हें कांवरियों को सीमा पर ही रोकने का सख्त निर्देश है। श्रावणी मेला के दौरान देवघर का कावंरिया पथ 24 घंटे बोल बम के नारों से गूंजता रहता था, लेकिन इस बार सन्नाटा है। शहर में भी रास्तों पर सोमवार को बहुत कम लोग नजर आए।



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