सीवान के मलमलिया में शहीद जवान बबलू सिंह की अंतिम यात्रा में जन सैलाब उमड़ पड़ा। शहीद की शवयात्रा सैन्य सम्मान के साथ उनके निवास (मदारपुर) से रवाना हुई। इसमें बड़ी तादाद में स्थानीय निवासी शामिल हुए। शहीद की पार्थिव देह को नमन कर पैदल और वाहनों के काफिले के साथ चल रहे लोग शहीद बबलू सिंह अमर रहें और भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे।
शनिवार को सूर्य की पहली किरण के साथ ही गांव में शहीद को अंतिम विदाई देने वाले हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय विधायक के साथ-साथ वरीय प्रशासनिक अधिकारी और सेना के जवानों की उपस्थिति में बबलू सिंह की अंतिम यात्रा निकाली गई। परिजन सहित उपस्थित भीड़ की आंखें नम थी। अंतिम यात्रा में शहीद के पार्थिव शरीर वाले सेना के वाहन के पीछे सैकड़ों वाहनों का काफिला और पैदल हुजूम चल रहा था। तिरंगा लहराते युवाओं द्वारा शहीद बबलू सिंह अमर रहे के लगातार लगाए जा रहे थे।
12 वर्षीय यश देगा मुखाग्नि
तीन दिनों से पति के शव के घर आने का इंतजार कर रही पत्नी विनीता देवी बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। शहीद जवान बबलू सिंह अपने दो बड़ी बहनों का अकेला छोटा भाई थे। वे अपने पीछे 2 बेटी और एक बेटा छोड़ कर चले गए। बड़ी बेटी सिमी कुमारी 15 वर्ष की है, तो वहीं एक बेटा यश कुमार 12 साल का हैं जबकि सबसे छोटी बेटी शिल्पी कुमारी 8 साल की है। सीवान के लाल बबलू सिंह को उनका पुत्र यश कुमार मुखाग्नि देगा।


शहीद बबलू सिंह। (फाइल फोटो)

21 जुलाई को ड्यूटी के दौरान करंट लगने से हुई थी मौत
सीवान के बसंतपुर थाना इलाके के मदारपुर गांव के रहने वाले बच्चा सिंह के इकलौते पुत्र बबलू सिंह राजस्थान में आर्मी के जवान के रूप में नौकरी करते थे। जहां बीते 21 जुलाई को करंट लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के लिए स्थानीय आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के क्रम में उन्होंने दम तोड़ दिया था




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