बिहार सरकार और किसानों के बीच की लड़ाई अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गई है। सहकारिता विभाग के खिलाफ किसान संगठन ने PIL दायर किया है। किसान अधिकार मंच ने गेहूं खरीद में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि किसानों के नाम पर वैसे लोगों से गेहूं खरीदा गया है, जो सरकारी कर्मचारी हैं।
PIL में किसानों की तरफ से गड़बड़ी को लेकर प्रमाण भी दिए गए हैं। किसानों की मानें तो गेहूं अधिप्राप्ति में सरकारी कर्मचारियों को भी किसान बताकर उनसे गेहूं खरीदा गया है। बक्सर के चौसा प्रखंड में आंगनबाड़ी सेविका को किसान बताकर उससे गेहूं खरीदा गया है। यही नहीं, PDS दुकानदारों से भी खरीदारी की गई है।

पिछले साल की तुलना में रिकॉर्ड हुई है खरीदारी
सहकारिता विभाग के आंकड़े के मुताबिक, बिहार में इस साल किसानों से गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई है। पिछले साल केवल 3710 मीट्रिक टन गेहूं खरीद करनेवाली सहकारिता विभाग ने इस बार साढ़े चार लाख मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की है। पिछले साल केवल 980 किसानों से गेहूं खरीद करने वाले विभाग ने इस बार 96 हजार से ज्यादा किसानों से गेहूं खरीद की है।

आंकड़ों में जानिए गेहूं खरीद की स्थिति
- लक्ष्य था सात लाख मीट्रिक टन
- खरीद हुई- 4.43 लाख मीट्रिक टन की
- लक्ष्य का 63.30 फीसद
- गेहूं की कुल कीमत – 875 करोड़ 18 लाख रुपये
- कैश क्रेडिट लिमिट -929 करोड़
- लाभान्वित किसानों की संख्या-93,849
- अब तक कुल 69088 किसानों को 671 करोड़ 34 लाख रुपए का भुगतान
- 2020-21 में गेहूं खरीद की कुल मात्रा-4806 मीट्रिक टन




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