लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। इससे जिले के 10 प्रखंडों की 56 पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। पानी के फैलाव को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है। राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश डीएम प्रणव कुमार ने वरीय पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों को दिए हैं। डीएम ने कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ दायित्वों का निर्वहन करें। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जलस्तर में बढ़ोतरी से आपदा प्रबंधन विभाग भी अलर्ट मोड में है। प्रखंडों के स्थानीय पदाधिकारियों, विभिन्न तकनीकी विभागों के कार्यपालक अभियंताओं एवं वरीय प्रभारी अधिकारियों को लगातार मनीटङ्क्षरग करने को कहा गया है। स्वास्थ्य, पशुपालन एवं पीएचइडी को विशेष निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार अब तक बाढ़ से चार पंचायतें पूर्ण एवं 52 आंशिक रूप से प्रभावित हैं। एक लाख 19 हजार 745 की आबादी इससे प्रभावित हुई है। बचाव राहत कार्य के तहत 1,600 ड्राई राशन पैकेट व 14,270 पालीथिन शीट का वितरण किया गया है। 46 सरकारी समेत कुल 148 नावों का परिचालन प्रभावित क्षेत्रों में किया जा रहा है। 36 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं। इसमें अब तक 34,054 व्यक्तियों ने भोजन किया है। वहीं सात स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 4,256 हैलोजन टेबलेट का वितरण किया है। 40 पशु कैंप चलाए जा रहे हैं।
बागमती और गंडक नदी खतरे के निशान से नीचे
शुक्रवार शाम को बागमती नदी का जलस्तर 55.6 मीटर (खतरे का निशान 55.23 मी.) पर रहा। वहीं, गंडक नदी का जलस्तर 53.99 मीटर (खतरे का निशान 54.41 मी.) दर्ज किया गया। बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसका जलस्तर 53.51 मीटर पर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 52.53 मीटर से करीब एक मीटर अधिक है। जलस्तर में वृद्धि के बाद भी जिले के सभी मुख्य बांध सुरक्षित हैं। डीएम के निर्देश के बाद सभी वरीय पदाधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं।




Leave a Reply