प्रखंड की नौ पंचायतों से 41 गांवों के आठ हजार परिवारों की 45 हजार से अधिक की आबादी बूढ़ी गंडक नदी के बाढ़ के पानी से घिर गई है। इनमें कई गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क भंग हो गया है। कोठियां से लेकर रजवाड़ा, मुशहरी, बुधनगरा, विन्दा, मणिका विशुनपुर चांद और डुमरी गांव तक बूढ़ी गंडक नदी के दक्षिणी तटबंध पर बड़ी संख्या में परिवारों ने पशु सहित अपना डेरा डाल दिया है। इधर, अखाड़ाघाट पुल से आगे शेखपुर, बड़ा जगन्नाथ और अब्दुलनगर पंचायतों की बड़ी आबादी और जमालाबाद पंचायत की बड़ी आबादी ऊंचे स्थल पर पहुंच गई है।
मुशहरी और बोचहां के आथर विशुनपुर जगदीश पंचायत की 16,400 लोगों की आबादी आथर पुल के संपर्क पथ पर अपना डेरा जमा चुकी है। इनमें सभी जगहों पर रोशनी, शौचालय, पेयजल, पशुचारा, स्वास्थ्य सुविधाओं का घाेर अभाव है। अभी तक सरकारी नाव का परिचालन व सामुदायिक रसोई शुरू नहीं की गई है।
आथर की इंदल देवी, मंजू देवी, रूपम देवी आदि ने बताया कि अबतक प्रशासनिक स्तर पर पॉलीथिन तक मुहैया नहीं कराया गया है। रात के अंधेरे में बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पीने के पानी की है। मजबूरी में नदी के पानी से खाना बनाने से लेकर पीने के लिए उपयोग किया जा रहा है। बोचहां सीओ वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पॉलीथिन भेजा गया है। गुरुवार तक अन्य व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। इधर, मुशहरी सीओ सुधांशु शेखर ने बताया कि प्रभावित स्थलों पर नाव, पॉलीथिन की व्यवस्था गुरुवार तक कर ली जाएगी।




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