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मंत्री बने पशुपति पारस: जानिए रामविलास पासवान के बाद परिवार से पार्टी तक कैसे लड़ी जंग

कभी बड़े भाई रामविलास पासवान के साथ साये की तरह रहने वाले पशुपति कुमार पारस के लिए मोदी मंत्रिमंडल में जगह पाना इतना आसान नहीं रहा। परिवार से लेकर पार्टी तक उन्‍हें लम्‍बी लड़ाई लड़नी पड़ी। अंतत: भतीजे चिराग को इस जंग में मात देकर पशुपति ने न सिर्फ मंत्रिमंडल में अपनी जगह सुनिश्चित की बल्कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में भी अपनी स्थिति को सुरक्षित कर लिया। 

मोदी कैबिनेट में पशुपति कुमार पारस की एंट्री को उनके भतीजे चिराग पासवान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। चिराग ने इसका विरोध भी जताया है। लेकिन पशुपति को केंद्रीय मंत्रिमंडल में लिए जाने की अटकलें तभी से लगने लगी थीं जब चिराग को छोड़कर लोजपा के सभी सांसदों ने पशुपति को अपना नेता मान लिया था। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फोन पर पारस से बातकर रामविलास पासवान के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। तब यह सुनिश्चित माना जाने लगा कि उन्‍हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है। 

पशुपति कुमार पारस का जन्म छह जून 1957 को हुआ था। बताया जाता है कि पशुपति कुमार पारस अपने भाई रामविलास पासवान के साथ हमेशा साये की तरह रहते थे। रामविलास पासवान की तरह ही पशुपति कुमार पारस भी बिहार की दलित राजनीति का चेहरा माने जाते थे। पशुपति पारस खुद भी बताते हैं कि उन्‍होंने अपने बड़े भाई रामविलास के आशीर्वाद से ही राजनीति शुरू की और उनसे ही राजनीति के गुर भी सीखें। वह लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। पशुपति पारस और रामविलास पासवान के अलावा उनके एक और भाई रामचंद्र पासवान भी लोजपा के संस्थापक सदस्यों में से थे। तीनों में से दो भाइयों रामविलास और रामचंद्र का देहांत हो चुका है। 

लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं पारस 
पशुपति कुमार पारस ने अपने पैतृक जिले खगड़िया की अलौली सीट से पहली बार साल 1985 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह इसी सीट से पांच बार विधायक रहे। बाद में रामविलास पासवान की कर्मभूमि हाजीपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। पारस ने वर्ष 2019 में नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर लोजपा के टिकट पर हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। नीतीश मंत्रिमंडल में वह किसी सदन का सदस्‍य रहे बिना शामिल हुए थे। सीएम नीतीश ने बाद में उन्हें विधान पार्षद बनाया। पशुपति पारस, बिहार सरकार में पशुपालन एवं मतस्य विभाग के मंत्री थे। इसके साथ ही वह काफी लम्‍बे समय तक लोजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष भी रहे हैं। 

कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे चिराग 
पशुपति कुमार पारस, अभी अपने भतीजे चिराग के साथ सियासी जंग लड़ रहे हैं। उन्‍हें मोदी मंत्रिमंडल में लिए जाने पर चिराग पासवान कह चुके हैं कि वह इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। चिराग ने कहा है कि पारस लोजपा से निकाले जा चुके हैं। ऐसे में वह हमारे कोटे से मंत्री नहीं बन सकते। इसकी सूचना वह आयोग को भी दे चुके हैं और पीएम मोदी के संज्ञान में भी ला चुके हैं। बता दें कि चिराग पासवान के खिलाफ उनके चाचा और हाजीपुर से सांसद पशुपति कुमार पारस ने ही मोर्चा खोला है।

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