पटना से करीब 1000 गाड़ियों की काफिला के साथ चिराग पासवान हाजीपुर के सुल्तानपुर पहुंचे. कार्यक्रम स्थल पर उन्होंने कोई लंबा चौड़ा भाषण नहीं दिया. वहां मौजूद लोगों से इतना कहा कि अपना विश्वास और आशीर्वाद बनाए रखें, यहां से मेरी राजनीति का दूसरा अध्याय शुरू हुआ है. मैं आप सबके पास आज आशीर्वाद लेने आया हूं. कोई राजनीति चर्चा नहीं होगी. मेरे पापा के मरे हुए 9 महीने भी नहीं हुए कि मेरे चाचा ने खंजर भोंक दिया. इसलिए आज आपके बीच आया हूं. आशीर्वाद का हाथ कभी मेरे सर से उठने मत दिजिएगा.
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हाजीपुर को पापा मां समान मानते थे. हाजीपुर की वजह से ही पिता जी की पहचान थी. सुल्तानपुर में ही पिता जी की आत्मा बसती है. इसी वजह से इस जगह को चुना. आपका आशीर्वाद और स्नेह चाहता हूं. ये मेरे पिता की कर्मभूमि है.
दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती पर आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत के लिए चिराग पासवान पहले पटना पहुंचे. पटना एयरपोर्ट से चिराग पासवान हाईकोर्ट स्थिति बाबा अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए पहुंचे, लेकिन गेट नहीं खोला गया. इसके बाद वो हाजीपुर के लिए निकल पड़े. महात्मा गांधी सेतु पार करते ही सड़क के दोनों ओर चिराग समर्थकों की भीड़ काफी बढ़ गई. चिराग इस दौरान अपनी गाड़ी की छत पर बैठे रहे. सभी जगहों पर फूल-मालाओं से उनका स्वागत होता
बता दें कि 13 जून की शाम से ही LJP में कलह शुरू हो गई थी. 14 जून को चिराग पासवान को छोड़ बाकी पांचों सांसदों ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई और हाजीपुर सांसद पशुपति कुमार पारस को संसदीय बोर्ड का नया अध्यक्ष चुन लिया. इसकी सूचना लोकसभा स्पीकर को भी दे दी गई. 14 जून की शाम तक लोकसभा सचिवालय से उन्हें मान्यता भी मिल गई थी. इसके बाद चिराग पासवान ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पांचों बागी सांसदों को लोजपा से हटाने की अनुशंसा कर दी. फिर 17 जून को पटना में पारस गुट की बैठक में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया.




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