BIHARBreaking NewsSTATE

बिहार में लालू यादव के सहारे राजद में नया जोश भरने की कोशिश में तेजस्वी यादव

बिहार में विपक्षी खेमे की राजनीति के लिए लालू प्रसाद प्रभावशाली लाउडस्पीकर हैं, लेकिन साढ़े तीन वर्षों से अदालती चक्कर में गुम हैं। अब जमानत पर बाहर भी आए हैं तो राजनीतिक रूप से सक्रिय होने में सेहत का साथ नहीं मिल पा रहा है। फिर भी राजद के 25वें स्थापना दिवस समारोह ने उनके समर्थकों की उम्मीदें जगाई हैं। पांच जुलाई को लालू राजद कार्यकर्ताओं से आनलाइन रूबरू होने वाले हैं। इसी बहाने सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें सक्रिय करने की कोशिश है। हालांकि अस्वस्थता की वजह से उनकी भूमिका सीमित ही रहने वाली है। फिर भी माना जा रहा है कि लालू की सक्रियता से राजद समेत महागठबंधन के साथी दलों में नई ऊर्जा का संचार होगा। पिछले एक हफ्ते से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इसे भुनाने में भी लगे हैैं। 

लोकसभा में तीन तो विधानसभा चुनान में चार साल बाकी

बिहार में राजनीति गर्म होने का न तो अभी मौसम है और न माहौल। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल और विधानसभा चुनाव में चार साल की देरी है। विधानमंडल के बजट सत्र के बाद कोरोना की वजह से राजनीतिक सक्रियता भी बेहद कम हो गई है। अभी तक इंटरनेट मीडिया के जरिए सिर्फ बयानों का खेल ही चल रहा है। बैठकों का सिलसिला भी आनलाइन चल रहा है। इसी बीच लोजपा में टूट के बाद थोड़ा पारा चढ़ा है। कांग्रेस में तोडफ़ोड़ के खतरे ने भी सियासी तापमान को बढ़ाया है। बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास के असमय दौरे को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। ऐसे में लालू प्रसाद की मौजूदगी मात्र से ही विपक्ष के साथी दल भी सुकून महसूस कर सकते हैैं। 

सत्ता पक्ष में भी हलचल

जेल से लालू के बाहर आने के बाद से बिहार के सत्ता पक्ष में भी हलचल है तो इसे अकारण नहीं कहा जा सकता है। राजद प्रमुख की गिनती तिकड़मबाज नेताओं में होती है। रांची जेल में रहते हुए भी उन्होंने बिहार में सरकार गिराने की कोशिश की थी। अभी 11 जून को लालू के जन्मदिन पर विधायक तेज प्रताप यादव ने जब जीतनराम मांझी से मुलाकात की थी तो उसे भी लालू के सियासी तिकड़म से जोड़कर देखा गया था। यही कारण है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने स्वास्थ्य कारणों से जमानत पर रिहा होने का हवाला देकर लालू प्रसाद की राजनीतिक सक्रियता का विरोध किया है। उन्होंने सीबीआई से संज्ञान लेने का आग्रह भी किया है। राजद के कार्यक्रम में लालू की मौजूदगी का असर अन्य दलों पर पड़े न पड़े, लेकिन जदयू एवं भाजपा के प्रवक्ताओं के हमले के केंद्र में भी अभी प्रमुख रूप से लालू ही हैैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.