नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए देश में जल्द ही जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है. कंपनी ने कहा है कि क्योंकि भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने अब क्लीनिकल स्टडीज की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है, इसलिए वह इसके शीघ्र-से-शीघ्र भारत में मौजूदगी के लिए प्रयत्नरत है. कंपनी ने कहा कि वैक्सीन को लेकर उसकी केंद्र सरकार से बातचीत भी चल रही है.
जॉनसन एंड जॉनसन, भारत के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘डीसीजीआई की हालिया घोषणा के मुताबिक, अब भारत में कोरोना-रोधी टीकों के नैदानिक अध्ययनों (क्लीनिकल स्टडीज) को पूरा करने की कोई जरूरत नहीं है. हम भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि भारत में अपनी एकल-खुराक टीका (सिंगल डोज वैक्सीन) देने की हमारी क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए.’
दूसरी ओर, डीसीजीआई ने मुंबई की औषधि कंपनी सिपला को आपात उपयोग के लिए मॉडर्ना के कोविड-19 टीके के आयात की अनुमति दे दी है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इसके साथ ही कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक के बाद मॉडर्ना का टीका भारत में उपलब्ध होने वाला कोविड-19 का चौथा टीका होगा. नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी के पॉल ने नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मॉडर्ना के भारतीय साझेदार सिपला के मार्फत एक आवेदन मिला था, जिसके बाद मॉडेर्ना के कोविड-19 टीके को औषधि नियामक द्वारा सीमित आपात उपयोग की अनुमति दी गई है.’

गौरतलब है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ने फरवरी में जॉनसन एंड जॉनसन के कोविड-19 रोधी टीके को मंजूरी दे दी थी, जबकि ब्रिटेन में नियामकों ने देश में उपयोग के लिए इसे 28 मई को अपनी स्वीकृति दी थी.
नियामक ने कहा था कि जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक कंपनी जेनसेन द्वारा विकसित टीका कोविड-19 संक्रमण को रोकने में कुल मिलाकर 67 प्रतिशत और गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में 85 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है. इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर संग्रहित किया जा सकता है.



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