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पूर्वी चंपारण में सिकरहना नदी की तेज धारा में समाए दर्जनों घर, मचान पर जिंदगी

रविवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होने से शहर से लेकर देहात तक जलजमाव हो गया। नदियों के जलस्तर पर भी असर पड़ा। गंडक, बागमती, झीम, लालबकेया के जलस्तर में वृद्ध दर्ज की गई। हालांकि ये खतरे के निशान से नीचे हैं। गंडक बराज से 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पूर्वी चंपारण के सुगौली में सिकरहना नदी की तेज धारा के चलते दक्षिणी छपरा बहास पंचायत के दर्जनों घर नदी में समा गए हैं। कटाव अभी भी जारी है। बेघर हुए लोग मचान बनाकर गुजर कर रहे हैं

पश्चिम चंपारण के सिकटा के दक्षिणी इलाके के जगन्नाथपुर व महेशड़ा के बीच सिकरहना नदी की तेज धारा से करीब सौ मीटर सड़क ध्वस्त हो गई। आधा दर्जन पंचायतों के गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग हो गया है।

नरकटियागंज-चनपटिया मार्ग में तीसरे दिन आवागमन चालू हुआ। हालांकि गंडक नदी की बाढ़ से नौतन एवं बैरिया के दियारे में तबाही बरकरार है। 300 के आसपास परिवार अभी भी चंपारण तटबंध और नौतन-गोपालगंज मार्ग पर शरण लिए हैं। बगहा के पिपरासी में पीपी तटबंध के शून्य से 8.50 किलोमीटर के बीच जलस्तर में वृद्धि होने के फलस्वरूप कंट्री साइड में 100 से अधिक जगहों पर रेनकट होने से अधिकारी अलर्ट हैं।

बूढ़ी गंडक नदी के कटाव से फुलवरिया सहनी टोला के अस्तित्व पर खतरा

बूढ़ी गंडक नदी के कटाव से मेहसी प्रखंड अंतर्गत राजेपुर पंचायत के फुलवरिया सहनी टोला के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। नदी ने अबतक 10 घर को अपने गर्भ में समाहित कर लिया है। वही सरकार द्वारा कटावरोधी कार्य नहीं होने से ग्रामीण भविष्य को लेकर फिर ङ्क्षचतित हैं। बताया जाता है कि सेमराघाट के पास बसे राजेपुर के वार्ड नंबर 11 में तेजी से कटाव हो रहा है जिससे वकील सहनी, सीता साहनी, श्री सहनी, डांगर सहनी समेत अन्य के 10 घर अब तक नदी में समा गए। वहीं कई घर मुहाने पर खड़े हैं। 

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