शहर में जलजमाव के कारण छाेटे-मझाेले या कम पूंजी वालाें की रोजी-रोटी पर भी संकट अा गया है। बिक्री 60 प्रतिशत तक गिर गई है। पूरे दिन दुकान पर मेहनत के बाद किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पा रहा है। बारिश थमने पर कई ठेला, खोमचा वाले गुरुवार को तीसरे दिन दुकानदारी काे निकले। मोतीझील, धर्मशाला व स्टेशन रोड में भारी जलजमाव से कई दुकानों में दोपहर तक बोहनी भी नहीं हुई। इन दुकानदारों के अनुसार जलजमाव के कारण एक ताे दुकान लगाना मुश्किल हाेता है। फिर ग्राहक भी नहीं रुकते। गली-मोहल्लाें में स्थिति और बदतर है।
पानी भरे हाेने से खरीदारी के लिए लाेग कम ही निकलते हैं। धर्मशाला चौक पर तो ग्राहक रुकना तक पसंद नहीं करते, बिक्री क्या हाेगी : धर्मशाला चौक स्टेशन रोड में भारी जलजमाव के चलते जूते-चप्पल, किचन सामग्री के दुकानदारों की रोजी बंद हाे गई है। अब्दुल अहद ने बताया- साढ़े 12 बजे तक एक ग्राहक आया। आम दिनाें में 35-40 ग्राहक आ जाते थे। मोतीझील ओवरब्रिज के नीचे फुटपाथ पर कपड़ा बेचने वाले अशोक ने कहा कि बारिश होते ही ग्राहक आने बंद हाे जाते हैं। तीन दिनों से सिर्फ बैठ रहे हैं। बिक्री नहीं है, लेकिन पार्किंग के ठेकेदार को पैसा देना ही पड़ता है।
ऐसे रोज 200 होती कमाई, अभी इतनी बिक्री भी नहीं
बेला रोड में गुमटी में बिस्कुट, पान-मसाला बेचने वाली 99 साल की काजल देवी पानी कम होने पर दो दिन बाद गुरुवार काे दुकान पर बैठीं। कहा- ऐसे 200 रुपए राेज कमा लेती हूं, अभी इतनी बिक्री भी नहीं होती। ठेले पर घूमकर आम बेच रहे धीरनपट्टी के पप्पू ने कहा- शेरपुर चौक पर दुकान लगाते थे। बारिश में बिक्री ठप होने से मोहल्लों में निकले हैं। जलजमाव के कारण फिर भी बिक्री नहीं हो रही है।
फुटपाथी दुकानदारों काे कोई भी देखने वाला नहीं है। बेरोजगारी में दो वक्त की रोटी के लिए पूरे दिन सड़क पर रहते हैं। कोरोना संकट के बाद बाजार खुला, तो जलजमाव जान ले रहा है। घर में बैठे रह नहीं सकते। इसलिए दुकान सजाए बैठे रहते हैं।
– बबलू चौधरी, कोषाध्यक्ष, फुटपाथी दुकानदार संघ
शहर में 20 हजार फुटपाथी दुकानदार हैं। इनमें कई ठेला लेकर गांवों से आते हैं। एक दिन की बारिश से दिन दुकानदारी प्रभावित हो जाती है। पूरे दिन एक पैर पर खड़ा रहने पर भी 200-300 रुपए कमाई नहीं है। फुटपाथी दुकानदारों से ही भीड़ दिखती है।
– शंभू शरण ठाकुर, संरक्षक, फुटपाथी दुकानदार यूनियन





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